बालाघाट, रितेश सोनी। दक्षिण बैहर के बिरसा और बैहर क्षेत्र के प्रभावित ग्रामों में संक्रामक बीमारी की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय है। प्रशासन की ओर से छात्रावासों एवं आश्रमों में रह रहे बच्चों की सुरक्षा, साफ-सफाई, पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य निगरानी को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अधीक्षकों को छात्रावास में नियमित रूप से रहने तथा बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।


इसी बीच 17 सितंबर को मुरकुट्टा बालक आश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। कवरेज के दौरान पढ़ाई के समय आश्रम के कुछ बच्चे परिसर से बाहर गांव में खेलते नजर आए। ग्रामीणों और आश्रम में अध्ययनरत बच्चों ने आरोप लगाया कि अधीक्षक अक्सर दोपहर बाद आश्रम छोड़कर चले जाते हैं और व्यवस्था महिला रसोइया व चपरासी के भरोसे रहती है।


आश्रम परिसर में टूटे-फूटे और गंदे शौचालय, खराब वाटर फिल्टर, पुराने बेड, छेद वाली मच्छरदानियां, अधूरी जानकारी वाले सूचना बोर्ड और साफ-सफाई की कमी जैसी अव्यवस्थाएं भी दिखाई देने का दावा किया गया। बच्चों के मनोरंजन एवं खेल सामग्री का भी अभाव बताया गया। वहीं रसोई में गैस चूल्हा और सिलेंडर लंबे समय से इस्तेमाल नहीं होने तथा जंगल से लकड़ी लाकर चूल्हे पर भोजन बनाए जाने की बात सामने आई।


17 सितंबर को एक बच्चे की तबीयत खराब होने की जानकारी रसोई कर्मचारी ने मौके पर पहुंची चलित स्वास्थ्य टीम को दी। स्वास्थ्य टीम ने आश्रम पहुंचकर बच्चे के रक्त की जांच की और दवा उपलब्ध कराई। मुरकुट्टा संवेदनशील क्षेत्र में शामिल है, ऐसे में आश्रम की व्यवस्थाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।


दक्षिण बैहर में संक्रमण से आदिवासी समुदाय के बच्चों की मौतों के बाद प्रशासन पहले से ही दबाव में है। ऐसे में सरकारी संस्थागत नियमों और कलेक्टर के निर्देशों के पालन में कथित लापरवाही सामने आना गंभीर विषय है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग आश्रम की व्यवस्थाओं की जांच कर जिम्मेदारी तय करता है या नहीं।