मुंबई। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर भाजपा नेता किरीट सोमैया की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुसलमानों की आबादी और प्रजनन दर को लेकर उठाए जा रहे सवालों को नफरत फैलाने की कोशिश बताया। इसके साथ ही, उन्होंने बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर सोनिया गांधी की टिप्पणी पर कांग्रेस को भी निशाने पर लिया और कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में भाजपा-आरएसएस के साथ कांग्रेस की भूमिका भी कम नहीं रही है। वहीं, अमेरिकी सीनेटर के रूप में अब्दुल अल-सैयद के चुने जाने पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए इसे ऐतिहासिक जीत बताया।किरीट सोमैया की ओर से जनसांख्यिकीय बदलाव के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के बारे में पूछे जाने पर वारिस पठान ने कहा कि आखिर कुछ लोगों को इस बात से परेशानी क्यों हो रही है कि लोग बच्चे पैदा कर रहे हैं। अगर किसी को अधिक बच्चे पैदा करने की इच्छा है तो वह भी ऐसा कर सकता है, उसे कौन रोक रहा है। इस तरह के मुद्दे उठाने का उद्देश्य केवल समाज में नफरत फैलाना और मुसलमानों को बदनाम करना है। संबंधित नेताओं को जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों और तथ्यों की जानकारी नहीं है, लेकिन वे बिना जानकारी के बयान देते रहते हैं।
उन्होंने मुस्लिम समुदाय की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुसलमानों में प्रजनन दर लगातार घट रही है। वर्ष 1992 में मुस्लिम समुदाय की टीएफआर 4.4 थी, जो 2015-16 में घटकर 2.6 और 2019-21 के दौरान 2.3 रह गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उनके निजी आंकड़े नहीं, बल्कि सरकारी आंकड़े हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन आंकड़ों को देखे बिना जनसंख्या को लेकर इस तरह की बातें क्यों की जा रही हैं। पठान ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के तीन-चार बच्चे पैदा करने संबंधी बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि जब ऐसे बयान दिए जाते हैं, तब संबंधित लोग सवाल क्यों नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि बच्चे पैदा करने के मुद्दे पर मुसलमानों को निशाना बनाने के बजाय सभी को समान नजरिए से देखना चाहिए।
सोनिया गांधी की बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर की गई टिप्पणी पर पठान ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना है कि बाबरी मस्जिद को एक षड्यंत्र के तहत शहीद किया गया था। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को देश और लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया। पठान ने कहा कि उनका मानना है कि जहां मस्जिद थी, वहां मस्जिद है और कयामत तक मस्जिद ही रहेगी। इस मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद से जुड़े पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की भूमिका भी ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रही है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस ने बाद में मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर प्रस्ताव और संकल्प की बात की थी, लेकिन इस दिशा में वास्तव में क्या कदम उठाए गए? उन्होंने कहा कि कुछ भी नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मुसलमानों के वोटों की राजनीति की। पठान ने कहा कि भारत का मुस्लिम समुदाय अब राजनीतिक रूप से पहले से अधिक जागरूक हो चुका है और वह समझता है कि इतने वर्षों तक किसने शासन किया तथा उसके साथ क्या हुआ। उन्होंने सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विभिन्न कमेटियों की रिपोर्टों में भी मुस्लिम समुदाय की पिछड़ी स्थिति सामने आई है। ऐसे में केवल चुनाव के समय मुसलमानों को बहलाने की कोशिश करना उचित नहीं है। बाबरी मस्जिद विध्वंस की शुरुआत से लेकर अंत तक भाजपा और आरएसएस की भूमिका रही, लेकिन कांग्रेस की भूमिका को भी कम करके नहीं देखा जा सकता।
अमेरिकी सीनेटर के रूप में अब्दुल अल-सैयद के चुने जाने पर वारिस पठान ने खुशी जाहिर की। उन्होंने इसे ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि अब्दुल ने चुनाव जीतकर अपनी जगह बनाई है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि मुसलमानों के लिए 'अब्दुल' शब्द का इस्तेमाल जिस तरह किया जाता रहा है, अब उसी नाम का व्यक्ति अमेरिका में चुनाव जीतकर सीनेट तक पहुंचा है। अब्दुल गरीबों की आवाज बनेंगे और उनके अधिकार और इंसाफ की बात करेंगे। एक दिन अब्दुल भारत के प्रधानमंत्री भी बनेंगे और वह दिन दूर नहीं है। अब्दुल अपनी जीत के माध्यम से लोगों की आवाज को मजबूती से उठाएंगे।













