छतरपुर, विनोद मिश्रा। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इन दिनों मरीजों और उनके परिजनों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। कलेक्टर मृणाल मीणा द्वारा समय-समय पर अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में सुधार के सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद जमीनी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आ रहा है। अस्पताल की चौथी मंजिल पर हालात इतने खराब हैं कि एक ही पलंग पर तीन-तीन मरीजों को लेटने की नौबत आ रही है। वहीं, बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई मरीज जमीन पर इलाज कराने को मजबूर हैं।


जिला अस्पताल की नई पांच मंजिला बिल्डिंग बनकर तैयार हो चुकी है, लेकिन समय पर इसका संचालन शुरू नहीं होने के कारण मौजूदा अस्पताल पर मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सीमित नर्सिंग स्टाफ और बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टूडेंट के भरोसे व्यवस्थाएं संचालित होने की बात सामने आ रही है। इमरजेंसी वार्ड में भी सीमित डॉक्टरों के भरोसे मरीजों को उपचार दिया जा रहा है।


छतरपुर जिला अस्पताल में जिले के अलावा उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। मरीजों को बेहतर इलाज की उम्मीद रहती है, लेकिन अस्पताल की अव्यवस्थाओं की तस्वीरें आए दिन सामने आ रही हैं। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


दो माह से शौचालयों पर ताला

अस्पताल की चौथी और पांचवीं मंजिल पर मरीजों के लिए बनाए गए शौचालयों की स्थिति भी बेहद खराब है। जानकारी के मुताबिक पुरुष और महिला शौचालयों पर करीब दो माह से ताला लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि पानी लीकेज की समस्या के चलते शौचालयों को बंद किया गया है, लेकिन लंबे समय बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।


शौचालय बंद होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को चौथी-पांचवीं मंजिल से नीचे उतरकर जाना पड़ रहा है। वहीं, जो शौचालय चालू हैं, वहां सफाई व्यवस्था की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। गंदगी और दुर्गंध के कारण मरीजों के साथ आए परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


मेडिकल कॉलेज का सपना, जिला अस्पताल खुद अव्यवस्थाओं से जूझ रहा

छतरपुर में मेडिकल कॉलेज को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं और जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने की चर्चा भी लगातार होती रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।


लेकिन वर्तमान स्थिति में जिला अस्पताल खुद ही स्टाफ की कमी, बेड की कमी, सफाई व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज की तैयारियों और मौजूदा अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।


सख्त निर्देशों के बाद भी हालात जस के तस

कलेक्टर के निरीक्षण और सख्त निर्देशों के बावजूद यदि अस्पताल में मरीजों को एक ही पलंग पर तीन-तीन की संख्या में लेटना पड़े, कई मरीज जमीन पर इलाज कराने को मजबूर हों और शौचालयों पर महीनों तक ताला लगा रहे, तो यह व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।


अब सवाल यह है कि जब जिला अस्पताल में लगातार मरीजों का दबाव बढ़ रहा है और नई बिल्डिंग भी तैयार है, तो उसका संचालन कब शुरू होगा? साथ ही मरीजों को पर्याप्त बेड, साफ-सफाई, शौचालय और पर्याप्त चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ की सुविधाएं कब मिलेंगी? जिम्मेदार अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद यदि स्थिति नहीं बदलती, तो आखिर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?