भोपाल। मध्य प्रदेश में दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) के गंभीर मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए अब 'फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट' (FTSC) की कार्यशैली को सख्त और तेज करने की कवायद शुरू कर दी गई है। राज्य में 67 FTSC संचालित होने के बावजूद 31 मार्च 2026 तक 10,628 मामले पेंडिंग हैं। इनमें से 9,278 प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें पुलिस चार्जशीट दाखिल हुए दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है। यह सख्ती छत्तीसगढ़ के बस्तर में 19 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद अमल में लाई जा रही है।


3 महीने में आए 10,533 नए केस, दो महीने में फैसले का प्रतिशत सिर्फ 7.16%

आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 के बीच मध्य प्रदेश की इन विशेष अदालतों में 10,533 नए मामले दर्ज हुए, जबकि इस अवधि के दौरान केवल 1,323 मुकदमों का ही निपटारा हो सका। निर्धारित मापदंडों के तहत चार्जशीट दाखिल होने के दो महीने के भीतर फैसला होना चाहिए, लेकिन केवल 88 मामलों में ही इस समय-सीमा के भीतर फैसला आ सका। इसका सीधा अर्थ यह है कि निर्धारित समय-सीमा में केस निपटाने का दर महज 7.16 प्रतिशत ही रहा।


प्रति माह 14 मामलों का लक्ष्य, वर्तमान रफ्तार 6.11 पर सिमटी

मानकों के अनुसार प्रत्येक FTSC कोर्ट को एक साल में 165 मुकदमों का निस्तारण करना अनिवार्य है, जिसका मासिक औसत लगभग 13.75 यानी 14 मामले प्रति माह बैठता है। इसके विपरीत, वर्ष 2025 के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में FTSC का औसत निस्तारण दर केवल 6.11 केस प्रति कोर्ट प्रति माह ही रहा। यानी अदालतें तय लक्ष्य के मुकाबले आधी रफ्तार से काम कर रही हैं।


316 मामले 5 साल से भी ज्यादा पुराने, DNA जांच की होगी समीक्षा

31 मार्च 2026 तक लंबित कुल 10,628 मामलों के विश्लेषण से पता चलता है कि मुकदमों के पेंडिंग रहने का दायरा काफी बड़ा है:

2 महीने से कम पुराने: 1,350 मामले

2 से 12 महीने पुराने: 4,026 मामले

1 से 5 साल पुराने: 4,936 मामले

5 साल से ज्यादा पुराने: 316 मामले


मामलों के अटकने की वजह जानने के लिए मध्य प्रदेश लोक अभियोजन संचालनालय ने सभी जिलों से अद्यतन रिपोर्ट मांगी है। इसमें विशेष तौर पर DNA सैंपल एकत्र करने, लैब से रिपोर्ट मिलने में देरी और इसके जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने के निर्देश दिए गए हैं।


मध्य प्रदेश में दोषसिद्धि दर 23.32 प्रतिशत

वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में दोषसिद्धि (Conviction Rate) दर 23.32% दर्ज की गई। यह मध्य क्षेत्र की औसत दर (23.97%) के करीब है, जबकि राष्ट्रीय औसत (17.43%) से बेहतर है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार, समय पर DNA जांच सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर विशेष अदालतों (FTSC) की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।