पन्ना। मध्य प्रदेश की मझगांय डैम परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांगों को लेकर चल रहा ‘चिता आंदोलन’ सोमवार को 24वें दिन भी पूरी उग्रता के साथ जारी रहा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जनअधिकार कार्यकर्ता अमित भटनागर को पन्ना जेल में 7 दिनों के आमरण अनशन के बाद गंभीर हालत में रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक तरफ जहां प्रशासन गिरते स्वास्थ्य का हवाला दे रहा है, वहीं भटनागर ने इसे अनशन तुड़वाने की साजिश बताया है। इधर डैम स्थल पर प्रभावित ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि नेताओं की गिरफ्तारी और दमनकारी नीतियों से आंदोलन कमजोर नहीं होगा।


'अस्पताल के बेड से भी अनशन जारी रहेगा' — अमित भटनागर

अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद अनशनकारी अमित भटनागर ने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाए: भटनागर ने कहा, “प्रशासन सोचता है कि जगह बदलने से आंदोलन खत्म हो जाएगा, तो यह उसकी गलतफहमी है। यह अस्पताल में जबरन भर्ती करवा कर अनशन तुड़वाने की साजिश है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मझगांय डैम से प्रभावित एक-एक आदिवासी परिवार, महिला और किसान को उनका पूरा मुआवजा और पुनर्वास का हक नहीं मिल जाता, तब तक अस्पताल के बेड से भी उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।


गिरफ्तारी और अस्पताल शिफ्टिंग से भड़का जनआक्रोश

जय किसान संघ के अनुसार, अमित भटनागर की गिरफ्तारी और फिर पन्ना जेल से रीवा अस्पताल शिफ्ट किए जाने की घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में जनआक्रोश चरम पर पहुंच गया है। जिला प्रशासन का दावा है कि पन्ना जेल में अनशन के दौरान भटनागर की सेहत तेजी से बिगड़ रही थी, जिसके चलते चिकित्सीय परामर्श पर उन्हें उच्च स्तरीय इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल भेजा गया। जय किसान संघ और स्थानीय आंदोलनकारियों का कहना है कि अमित भटनागर पूरी तरह स्वस्थ थे और प्रशासन केवल आंदोलन का दबाव कम करने के लिए यह हथकंडे अपना रहा है।


मझगांय डैम स्थल पर ग्रामीणों का हल्लाबोल: रिहाई और मुआवजे की प्रमुख मांगें

आंदोलन के 24वें दिन मझगांय डैम स्थल पर प्रभावित ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रमुख मांगें रखीं: जेल में बंद आंदोलन के प्रमुख चेहरों अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार, हिसाबी राजपूत समेत सभी गिरफ्तार ग्रामीण कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए। डैम प्रभावित आदिवासी परिवारों, किसानों और महिलाओं को पूर्व घोषित राशि के अनुसार पूरा मुआवजा दिया जाए और पुनर्वास के अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रशासन और सरकार के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं डैम स्थल पर आकर आंदोलनकारियों से सीधी बातचीत करें और समस्याओं का स्थायी समाधान निकालें।


ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और सभी साथियों की रिहाई नहीं हो जाती, तब तक 'चिता आंदोलन' किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा।