नई दिल्ली, 7 नवंबर । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने यूरोप के प्रमुख शोध और नवाचार कार्यक्रम 'होराइजन यूरोप' से भारत के जुड़ने के लिए बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस समझौते से भारतीय शोधकर्ताओं और संस्थानों को यूरोपीय संघ की फंडिंग, शोध समूहों और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे तक सीधी पहुंच मिलेगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट पर लिखा, ''भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने 'होराइजन यूरोप' के साथ भारत के जुड़ने के लिए बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इसका उद्देश्य अनुसंधान सहयोग के लिए एक दीर्घकालिक ढांचा तैयार करना है, जो जनवरी 2026 में ऐतिहासिक भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं की ओर से तय किए गए दृष्टिकोण के अनुरूप है।''
मंत्रालय ने कहा कि यह कदम दोनों पक्षों के बीच शोध सहयोग को लंबे समय के लिए संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। भारत की इस कार्यक्रम में भागीदारी पहले से चल रहे रीसर्च एंड इनोवेशन (आरएंडडी) प्रोजेक्ट्स, भारत-ईयू विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते और भारत-ईयू व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तहत हो रहे सहयोग को और मजबूत बनाएगी।
इससे भारतीय शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत को होराइजन यूरोप के तहत मिलने वाली फंडिंग के लिए आवेदन करने का मौका मिलेगा। साथ ही वे यूरोपीय शोध समूहों के साथ मिलकर काम कर सकेंगे और अत्याधुनिक शोध सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
मंत्रालय के अनुसार, यह भागीदारी शोध और तकनीक के क्षेत्र में प्रतिभाओं के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगी। इसके अलावा महत्वपूर्ण तकनीकों, मानकों और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधानों के संयुक्त विकास का रास्ता भी खुलेगा।
'होराइजन यूरोप' के दूसरे स्तंभ के अंतर्गत आने वाले प्रमुख क्षेत्र जैसे स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, उद्योग और अंतरिक्ष, जलवायु, ऊर्जा एवं परिवहन, खाद्य और जैव-अर्थव्यवस्था भारत की शोध प्राथमिकताओं के काफी अनुरूप हैं। इन क्षेत्रों में भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इस साझेदारी से भारत के नवाचार और शोध तंत्र को बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर तब जब देश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस संभावित सहयोग पर चर्चा की शुरुआत 27 जनवरी 2026 को हुए ऐतिहासिक भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद हुई थी। इसके बाद 15 जुलाई 2026 को ब्रुसेल्स में आयोजित व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की मंत्रिस्तरीय बैठक में हुई सहमति के आधार पर औपचारिक वार्ता शुरू की गई थी।
यह समझौता भारत के वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों और उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर खोलेगा और उन्नत तकनीकों के विकास में भारत की भूमिका को और मजबूत बनाएगा।

















