नई दिल्ली, 19 जुलाई । ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने ऑपरेशन 'सैकेह (लाइटनिंग)' के तहत कुवैत में मौजूद अमेरिका के दो बड़े सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए। ईरानी सेना का कहना है कि अमेरिका की ओर से बार-बार किए जा रहे घातक हमलों के जवाब में ये हमले किए गए हैं।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स न्यूज' की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी सेना ने घोषणा की है कि उसने ऑपरेशन 'सैकेह (लाइटनिंग)' के 16वें चरण के तहत कुवैत में मौजूद अमेरिका के दो बड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
'फार्स न्यूज' ने सेना के हवाले से बताया कि ईरानी सेना ने बड़े पैमाने पर ड्रोन से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनया है। सेना का कहना है कि अमेरिका की ओर से ईरान पर बार-बार किए गए हमलों का जवाब करारा जवाब है।
सेना का कहना है कि इन हमलों में कैंप उदैरी में मौजूद अमेरिकी गोला-बारूद के भंडार को निशाना बनाया गया। इसके अलावा अली अल सलेम एयरबेस पर तैनात पैट्रियट मिसाइल रक्षा रडार सिस्टम और एक हवाई निगरानी रडार पर भी हमला किया गया।
ईरानी सेना के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार किए गए हमलों के जवाब में की गई। सेना का दावा है कि उन हमलों में आम नागरिकों की मौत हुई और पुलों, बुनियादी ढांचे तथा दूसरे गैर-सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया।
ईरान की सीमा से लगभग 104 किलोमीटर दूर स्थित कैंप उदैरी अमेरिका का एक प्रमुख सैन्य लॉजिस्टिक्स और फोर्स सपोर्ट केंद्र है। वहीं, अली अल सलेम एयर बेस अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए एक अहम एयरलिफ्ट केंद्र है और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के मुख्य प्रवेश द्वारों में से एक माना जाता है।
इससे पहले रविवार सुबह अमेरिका ने ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से के खुजेस्तान प्रांत में बन रहे डार्कहोविन न्यूक्लियर पावर प्लांट की साइट पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, एईओआई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि यह हमला स्थानीय समय के अनुसार सुबह 3:39 बजे (जीएमटी के अनुसार 24:09 बजे) हुआ। संगठन ने इसे आक्रामक और क्रूर कार्रवाई बताया और कहा कि यह ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, हालांकि संगठन ने यह नहीं बताया कि इस हमले में कोई हताहत हुआ है या किसी तरह का नुकसान हुआ है।




