नई दिल्ली। दिल्ली में सरकारी आदेशों के कथित उल्लंघन, जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन और अनाधिकृत प्रवेश के मामलों में पूछताछ के लिए सीजेपी के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका राजौरी गार्डन स्थित दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेश हुए। दोनों नेताओं से 13 अक्टूबर की घटनाओं को लेकर सामान्य जांच के तहत पूछताछ की गई।
पूछताछ के बाद सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने पत्रकारों से कहा कि 13 अक्टूबर की घटनाओं को लेकर एक सामान्य जांच हुई। हमने पहले भी कहा है और फिर दोहराते हैं कि हम किसी भी जांच में पूरा सहयोग करेंगे, चाहे वह जांच कोई भी एजेंसी कर रही हो। जंतर-मंतर या कहीं और, यहां तक कि सार्वजनिक सड़क पर भी तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं माना जाना चाहिए। हमें पूरा भरोसा है कि चल रही सभी जांच निष्पक्ष तरीके से और सही नीयत से की जाएंगी और हम इसमें पूरा सहयोग देंगे।
आशुतोष रांका ने विदेशी फंडिंग के आरोपों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से पूछिए कि अगर इसमें विदेशी फंडिंग शामिल थी, तो वे हमसे हाथ क्यों मिला रहे थे? वे हमसे बातचीत क्यों कर रहे थे? वे हमारे साथ बैठकर चर्चा क्यों कर रहे थे, हमारे साथ चाय और नाश्ता क्यों कर रहे थे? उनसे इसका जवाब मांगिए।"
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और अमेरिका से फंडिंग का आरोप लगाया जा रहा है। आप देश के सामने मौजूद असली मुद्दों को नजरअंदाज कर रहे हैं और बार-बार उसी घिसे-पिटे बयान पर आ जाते हैं। आपके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि इस देश में वोट क्यों चुराए जा रहे हैं। यह सरकार ज्ञानेश कुमार को क्यों बचा रही है? आपके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि परीक्षा के पेपर क्यों लीक हो रहे हैं या देश में इतनी बेरोजगारी क्यों है। इसके बजाय आप उसी 12 साल पुराने, बासी एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।"
वहीं, सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास ने विदेशी फंडिंग के आरोप को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा, "यह एक बेबुनियाद आरोप है। हम पहले दिन से ही इस बात का आधार मांग रहे हैं। 6 जून को हुए पहले विरोध-प्रदर्शन से भी पहले से सबूत मांग रहे हैं। इस आंदोलन और युवाओं के नेतृत्व वाले इस संघर्ष के खिलाफ किस तरह का नकारात्मक अभियान चलाया जा रहा है।"
सौरभ दास ने कहा, "3 जून को हमारी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी और तब से हम लगातार पूछ रहे हैं कि आपके इस तथाकथित आरोप का आधार क्या है? लेकिन अब तक कोई आधार सामने नहीं आया है। चार-पांच महीने बीत चुके हैं और अब वही झूठ, जिसे दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग फैला रहे थे, एक ऐसा चरमपंथी तंत्र जिनके पास कोई काम-धंधा नहीं है बल्कि उन्हें एक विश्वसनीय आंदोलन को बदनाम करने के लिए पैसे दिए जाते हैं। यह शर्मनाक है।"

















