पन्ना, अमित सिंह। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में मझगांय डैम और रुंज मध्यम सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावित किसानों का उचित मुआवजा व पुनर्वास की मांग को लेकर चल रहा सत्याग्रह अब उग्र टकराव के दौर में पहुंच गया है। पिछले 17 दिनों से जल सत्याग्रह, चिता पर लेटने, सूली और सांकेतिक फांसी जैसे नाटकीय व दर्दनाक तरीकों से विरोध दर्ज करा रहे आंदोलनकारियों पर पुलिस-प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं नेत्री दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत को पुलिस ने गिरफ्तार कर अजयगढ़ न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया है। वहीं, आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकार अमित भटनागर फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं। प्रशासनिक सख्ती के बाद प्रभावित गांव पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। पुलिस ने दिव्या अहिरवार समेत 13 नामजद व अन्य आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस बल पर हमला, बलवा और शासकीय कार्य में बाधा डालने जैसी बीएनएस (BNS) की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
पुलिस पर हमले का आरोप, बीएनएस की इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
पन्ना पुलिस प्रशासन का आरोप है कि आंदोलन स्थल को खाली कराने और समझाइश के दौरान आंदोलनकारियों की ओर से पुलिस टीम पर हमला किया गया और आपराधिक कृत्यों को अंजाम दिया गया। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 190 (गैरकानूनी जमावड़ा), 191(2), 191(3) (घातक हथियारों से बलवा), 109(1) (हत्या का प्रयास/गंभीर हमला), 296(b) (सार्वजनिक उपद्रव) और 351(3) (आपराधिक धमकी) सहित अन्य सुसंगत धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अजयगढ़ कोर्ट में पेशी के बाद दिव्या अहिरवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि कानून हाथ में लेने और पुलिस पर पथराव या हमला करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।
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अंधेरे में डूबे घर, पानी का भराव: 17 दिनों से तड़प रहे विस्थापित
दूसरी तरफ, विस्थापित ग्रामीणों का दर्द थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रभावित किसानों का कहना है कि डैम का पानी भरने से उनके आशियाने डूब चुके हैं और गांव में बिजली तक काट दी गई है। मूलभूत सुविधाओं से वंचित परिवार कीचड़ और अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है:
- उचित मुआवजा और पुनर्वास नदारद: डूब क्षेत्र में आए पुश्तैनी मकानों और उपजाऊ जमीनों का न तो नियम अनुसार मुआवजा दिया गया और न ही पुनर्वास स्थल पर बसाहट की समुचित व्यवस्था की गई।
- आवाज दबाने के लिए लाठीचार्ज: ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 17 दिनों तक शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से चिता व सूली आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया और फर्जी मुकदमे थोपकर नेतृत्वकर्ताओं को जेल भेज दिया।
- 'मांगों की जगह मिल रहा जेल का खौफ': ग्रामीणों ने दो-टूक कहा कि वे सरकार से सिर्फ अपना विधिक हक और मुआवजा मांग रहे हैं, लेकिन शासन बातचीत के जरिए समाधान निकालने के बजाय पुलिसिया दमन से उनकी आवाज दबा रहा है।
गिरफ्तारी के बाद भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी और गांव में भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद विस्थापित ग्रामीण झुकने को तैयार नहीं हैं। गांव में लगातार महिला और पुरुष किसान एकत्र हो रहे हैं और उनका कहना है कि जब तक प्रत्येक प्रभावित परिवार को पूरा मुआवजा और पुनर्वास का अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक उनका सत्याग्रह जारी रहेगा।
"मझगांय और रुंज परियोजना स्थल पर कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित करने और पुलिस बल पर हमले की घटना के संबंध में बीएनएस की सुसंगत धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया है। अन्य नामजद आरोपियों और फरार अमित भटनागर की तलाश जारी है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है।"
— वंदना चौहान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP), पन्ना













