पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में आयोजित 'संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ' रैली में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस ऐतिहासिक रैली में मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक विक्रांत भूरिया सहित आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के राम नारायण कुररिया, विजय कुमार, दीपमाला पटेल, किसान नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों की संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। रैली के दौरान प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पुलिस की कार्यशैली को लेकर जनता में जबर्दस्त आक्रोश देखने को मिला।
प्रदर्शनकारियों ने संविधान, लोकतंत्र और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसी मंच पर पिछले 28 दिनों से आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और 'चिता आंदोलन' के अगुवा अमित भटनागर का अनशन नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी महिलाओं के आग्रह पर समाप्त कराया, जिसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि हक की लड़ाई के लिए चिता आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
28 दिनों से जारी आमरण अनशन समाप्त, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
रैली का सबसे भावुक और प्रमुख केंद्र सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का अनशन स्थल रहा। क्षेत्र की जनसमस्याओं और विस्थापन व अधिकारों के मुद्दों को लेकर वे पिछले 28 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। रैली के दौरान मौके पर मौजूद आदिवासी महिलाओं ने उनसे जीवन रक्षा और आगे के संघर्ष के लिए अनशन समाप्त करने का भावुक आग्रह किया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंच पर पहुंचकर अपने हाथों से जल पिलाकर अमित भटनागर का 28 दिवसीय अनशन समाप्त कराया। अनशन समाप्ति के बावजूद आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि अनशन भले ही खत्म हुआ हो, लेकिन संवैधानिक अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर 'चिता आंदोलन' अनवरत जारी रहेगा।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बरसे उमंग सिंघार और विक्रांत भूरिया
रैली को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पन्ना जिले के प्रशासनिक रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों के समक्ष जनता की लंबित समस्याओं, विस्थापन और आदिवासी अधिकारों की अनदेखी को लेकर तीखी नाराजगी जताई। सिंघार ने कहा कि सरकार और प्रशासन लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास न करें। वहीं, विधायक विक्रांत भूरिया और अन्य वक्ताओं ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और संविधान पर किसी भी प्रकार का कुठाराघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय नागरिकों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन पन्ना से निकलकर भोपाल की विधानसभा तक पहुंचेगा।
कानून-व्यवस्था और संवैधानिक मर्यादाओं पर अमित भटनागर के सवाल
अनशन समाप्त होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने पन्ना जिले में कानून-व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में प्रशासन की ओर से लगातार ऐसी गतिविधियां और निर्णय लिए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर देश के कानून और संविधान की मूल भावना के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि शोषितों, किसानों और आदिवासियों की जायज मांगों को सुनने के बजाय प्रशासन दमनकारी नीतियां अपना रहा है, जिसके खिलाफ समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से लड़ना होगा।
आदिवासी अधिकारों और विस्थापितों के न्याय की उठी बुलंद मांग
रैली में शामिल विशाल जनसमूह ने संविधान की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के सम्मान और विशेष रूप से आदिवासी समाज के जल-जंगल-जमीन संबंधी पारंपरिक अधिकारों की बहाली की पुरजोर मांग उठाई। आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के पदाधिकारियों और किसान नेताओं ने कहा कि विकास के नाम पर स्थानीय निवासियों को बेदखल करने और उनके अधिकारों का हनन करने की साजिशों का कड़ा विरोध किया जाएगा। रैली में उमड़े जनसमर्थन और युवाओं-महिलाओं की भारी भागीदारी ने साफ संकेत दिया कि स्थानीय मुद्दों और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर जनता आर-पार के मूड में है।

















