छतरपुर, विनोद मिश्रा। बुंदेली लोकगीतों को देशभर में नई पहचान दिलाने वाले लोकगीत सम्राट स्वर्गीय पंडित देशराज पटेरिया की छठवीं पुण्यतिथि पर 5 सितंबर को छतरपुर में ‘बुंदेली संध्या’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बुंदेलखंड सहित मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे लोक कलाकारों ने उनके लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुतियां देकर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान कलाकारों और अतिथियों ने स्वर्गीय देशराज पटेरिया के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया।


स्वर्गीय पंडित देशराज पटेरिया के सुपुत्र विनय पटेरिया, परिवार एवं आयोजन समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोक कलाकार शामिल हुए। दमोह, बक्सवाहा, जबलपुर, पाटन, नरसिंहपुर, रायसेन, विदिशा, भोपाल, जालौन, छतरपुर, ललितपुर, सागर, चंदेरी, बांदा, पलेरा, नौगांव, मऊरानीपुर, झांसी और कानपुर सहित 50 से अधिक जिलों से कलाकार बुंदेली संध्या में पहुंचे।


लोकगीतों की प्रस्तुतियों से बांधा समां


कार्यक्रम में चंद्रभूषण पाठक, मिनी अनूप जलोटा, पवन तिवारी, जय सिंह राजा, जयप्रकाश पटेरिया, राजेश तिवारी, मुन्नालाल सैनी, दशरथ हंसमुख, सविता यादव, सुखदेव, हनुमत हिंदुस्तानी, लक्ष्मी ठाकुर, रेवाराम और पूनम अहिरवार सहित अनेक कलाकारों ने बुंदेली लोकगीतों की प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने देशराज पटेरिया के लोकप्रिय गीतों को अपनी आवाज में प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भावपूर्ण बना दिया। मंच से कलाकारों और अतिथियों का सम्मान भी किया गया।


कलाकारों ने उठाई मरणोपरांत पद्मश्री देने की मांग


बुंदेली संध्या के दौरान कलाकारों और अतिथियों ने एक स्वर में स्वर्गीय पंडित देशराज पटेरिया को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान देने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि देशराज पटेरिया को पद्मश्री मिलना केवल एक कलाकार का सम्मान नहीं होगा, बल्कि यह बुंदेली भाषा, लोककला, संस्कृति और पूरे बुंदेलखंड के सम्मान की बात होगी।


वक्ताओं ने कहा कि देशराज पटेरिया ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित पूरे बुंदेलखंड में बुंदेली भाषा को लोकगीतों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। उस दौर में जब सोशल मीडिया का अस्तित्व नहीं था, उनके गीत आकाशवाणी, रेडियो, टीवी और मंचीय कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों तक पहुंचते थे। आज भी उनके गीत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोकप्रिय हैं।


‘गहरो कुआं साठिया बालम’, ‘वो किसान की लली’, हरदोई के गीतों के साथ-साथ हास्य, श्रृंगार और पारंपरिक बुंदेली गीतों में उनका योगदान आज भी लोक संस्कृति में जीवंत है।


युवा कलाकारों को मिले बड़े मंच


कार्यक्रम में अतिथियों ने कहा कि ‘बुंदेली संध्या’ जैसे आयोजनों को संस्कृति विभाग से जोड़कर इसे व्यापक स्वरूप दिया जाना चाहिए। इससे बुंदेलखंड के वरिष्ठ कलाकारों के साथ नई पीढ़ी के लोक कलाकारों और प्रतिभाओं को भी अपनी कला प्रस्तुत करने का बड़ा मंच मिल सकेगा।


वक्ताओं ने कहा कि बुंदेली भाषा सरल, सहज और प्रभावशाली होने के साथ अपनी विशिष्ट लोक संस्कृति को समेटे हुए है। फिल्मों और अन्य मंचों पर भी बुंदेली भाषा एवं लोकधुनों का प्रयोग बढ़ रहा है। बुंदेलखंड के अनेक कलाकार अपनी प्रतिभा के दम पर देश-विदेश के बड़े मंचों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में लोककला और कलाकारों को संस्थागत संरक्षण एवं प्रोत्साहन दिए जाने की जरूरत है।


कई प्रमुख अतिथि रहे मौजूद


कार्यक्रम में पूर्व आईजी मिथिलेश शुक्ला, बाबा डॉक्टर रामकृष्ण कुसमरिया, पूर्व जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र प्रताप सिंह ‘गुड्डू राजा’, छतरपुर नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति सुरेंद्र चौरसिया, नौगांव नगर पालिका अध्यक्ष अनूप तिवारी, नौगांव जनपद अध्यक्ष राकेश पाठक, भाजपा जिला मंत्री अवधेश यादव सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।


‘बुंदेली संध्या’ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम हैं। कार्यक्रम में मौजूद कलाकारों और अतिथियों ने सरकार से मांग की कि लोकगीत सम्राट स्वर्गीय पंडित देशराज पटेरिया के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देते हुए उन्हें मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित किया जाए।