भोपाल। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव के चलते गुरुवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है जबकि कई अन्य जिलों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी दी गई है।
भोपाल स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, बालाघाट, मंडला, कान्हा, डिंडोरी, शहडोल, बाणसागर बांध, अनूपपुर, अमरकंटक, सीधी और सिंगरौली में बिजली कड़कने के साथ मध्यम दर्जे की आंधी-तूफान और बारिश होने की संभावना है।
सिवनी, जबलपुर, भेड़ाघाट, कटनी, उमरिया, बांधवगढ़, सतना, चित्रकूट, मैहर, रीवा, मऊगंज, पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर, खजुराहो, दमोह, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में बिजली कड़कने के साथ हल्की बारिश और आंधी-तूफान की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में 5-15 मिमी प्रति घंटे की दर से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई है, साथ ही बादलों से जमीन पर बिजली गिरने की 30-60 प्रतिशत संभावना भी है। अन्य क्षेत्रों में 5 मिमी प्रति घंटे से कम बारिश और बिजली गिरने की संभावना अपेक्षाकृत कम है।
मानसून की वापसी के बाद भी राज्य में बारिश का दौर जारी है। गुरुवार को पूर्वी क्षेत्र में मौसम के और खराब होने की आशंका है। रीवा, सतना, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश हो सकती है; कुछ जगहों पर चार इंच या इससे अधिक बारिश होने की संभावना है।
भोपाल, ग्वालियर, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड और श्योपुर जैसे शहरों में बादल छाए रह सकते हैं। साथ ही हल्की बारिश, तेज हवाएं और आंधी-तूफान देखने को मिल सकते हैं।
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे निचले इलाकों में जाने से बचें, आंधी-तूफान के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें और गीली सड़कों पर यात्रा करते समय सावधानी बरतें। 3 अक्टूबर को मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो गई, लेकिन इसके बावजूद पूरे महीने बारिश का दौर जारी रहा। ऐसा सामान्य मानसून पैटर्न से अलग मौसम प्रणालियों के कारण हुआ, जिसमें बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात का प्रभाव भी शामिल है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर के महीने में बारिश, गर्मी और ठंड, तीनों का मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है।
इस महीने कहीं तेज धूप और साफ आसमान रहा, तो कई जिलों में रात के तापमान में गिरावट के साथ-साथ बारिश भी दर्ज की गई। दक्षिण-पश्चिम मानसून लगभग 100 दिनों तक सक्रिय रहा, और इसकी विदाई के बाद भी स्थानीय मौसम प्रणालियों की वजह से बारिश का सिलसिला जारी है।
















