भोपाल। सितंबर के अंतिम सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश में हुई मूसलाधार बारिश के बावजूद प्रदेश का कुल मानसूनी आंकड़ा सामान्य बारिश के मानक (96% से 104%) से महज 0.6% पीछे रह गया है। मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार, 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाले आधिकारिक मानसूनी सीजन में अब महज 4 दिन का समय शेष है। ऐसे में प्रदेश के आधे जिलों में इस वर्ष बारिश का कोटा अधूरा रहने की पूरी संभावना है।


1. प्रदेश में अब तक की स्थिति: सामान्य से 1.4 इंच कम गिरा पानी

राज्य में अब तक औसतन 35.6 इंच (904 मिमी) यानी कुल कोटे की 95.4% बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य औसत (37 इंच या 940.4 मिमी) से लगभग 1.4 इंच (4% कम) है। पूर्वी मध्य प्रदेश (जबलपुर, रीवा, सागर व शहडोल संभाग) में हालिया बारिश से आंकड़ा सुधरा है और वहां सामान्य से 4% अधिक बारिश दर्ज हुई है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसतन 11% कम पानी गिरा है। मऊगंज, सतना और उमरिया में सर्वाधिक 50 इंच तक बारिश हो चुकी है, जबकि इंदौर संभाग के आलीराजपुर जिले में 20 इंच का आंकड़ा भी पार नहीं हो सका है।


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2. 25 जिलों में कोटा हुआ 100% फुल; 7 जिले सामान्य के करीब

प्रदेश के जिन 25 जिलों में शत-प्रतिशत या उससे अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है, उनमें शामिल हैं: मध्य व पश्चिमी क्षेत्र: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, दतिया, आगर-मालवा, भिंड और श्योपुर।पूर्वी व बुंदेलखंड/विंध्य क्षेत्र: पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, कटनी और मंडला। इसके अलावा नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, अशोकनगर, दमोह, मंदसौर और मुरैना जैसे 7 जिलों में बारिश का आंकड़ा 90% से 99% के बीच पहुंच चुका है।


3. लबालब हुए प्रदेश के प्रमुख जलस्रोत; बरगी और बड़ा तालाब के खुले गेट

सितंबर की बारिश से राज्य के प्रमुख बांधों और जल संरचनाओं की स्थिति में भारी सुधार हुआ है: भोपाल के बड़ा तालाब का फुल टैंक लेवल भर जाने से भदभदा और कलियासोत डैम के गेट खोलने पड़े। वहीं, शनिवार को जबलपुर के बरगी डैम के गेट खोलकर जल निकासी की गई। इंदिरा सागर, गांधी सागर, बाणसागर, बारना, कोलार, महान, राजघाट, ओंकारेश्वर, जोहिला और कुंडालिया बांधों में क्षमता का 90% से अधिक पानी जमा हो चुका है।


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4. 9 दिन देरी से आया था मानसून, बाद में पकड़ी रफ्तार

इस वर्ष मानसून 9 दिन की देरी से 24 जून को मध्य प्रदेश पहुंचा था, जिसके कारण जून माह में 30% बारिश की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि, जुलाई के पहले सप्ताह से शुरू हुआ मूसलाधार बारिश का दौर अगस्त और सितंबर के अधिकांश दिनों में जारी रहा, जिससे बारिश का घाटा काफी हद तक कवर हो गया।


30 सितंबर के बाद होने वाली बारिश को मानसूनी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाएगा, इसलिए अगले चार दिनों में इंदौर व मालवा-निमाड़ क्षेत्र के पिछड़े जिलों के कोटे में बड़े बदलाव की उम्मीद कम ही है।