नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने शनिवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल पंजाब में चल रही कथित असुरक्षित स्लीपर बसों के खिलाफ एनएचआरसी की कार्रवाई पर सवाल उठाकर लोगों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे का विरोध कर रहे हैं।प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा कि पंजाब सरकार एक तरफ यह दावा करती है कि राज्य में कोई स्लीपर बस पंजीकृत नहीं है, जबकि दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल एनएचआरसी की जांच का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "डरिए मत अरविंद। हमने अभी तक उन कमीशनों की जांच शुरू नहीं की है, जो इन बसों को चलाने से आपको मिल रहे हैं।"
कानूनगो ने आरोप लगाया कि कमीशन और राजनीतिक हितों के लिए आम नागरिकों की जान जोखिम में डाली जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को कमीशन लेने के बजाय सुरक्षित बस यात्रा सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी नागरिक की जान को खतरा पहुंचता है तो इसके लिए जवाबदेही तय होगी।
एनएचआरसी सदस्य ने कहा कि पंजाब सरकार को भेजा गया नोटिस किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर में चल रहे अभियान का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में आयोग ने मानकों के अनुरूप नहीं चल रहीं करीब 1,000 बसों के खिलाफ कार्रवाई की है और उन्हें या तो संचालन से हटवाया गया है या उन पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं।
कानूनगो के अनुसार, जनवरी 2026 में पंजाब परिवहन विभाग ने आयोग को भेजे जवाब में कहा था कि राज्य में कोई स्लीपर कोच बस पंजीकृत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो यह पता लगाना जरूरी है कि ऐसी बसें किस आधार पर संचालित हो रही हैं। इसी वजह से जांच शुरू करने के लिए पत्र भेजा गया है।
इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर एनएचआरसी की जांच पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि मानवाधिकार आयोग ने पहली बार बसों का निरीक्षण किया है और केवल पंजाब की उन सुपर डीलक्स बसों को निशाना बनाया गया है, जिनसे लोग धार्मिक यात्राएं करते हैं।
केजरीवाल ने पूछा था कि क्या एनएचआरसी ने उत्तर प्रदेश रोडवेज या अन्य राज्यों की बसों का भी निरीक्षण किया है। उनका दावा था कि सिर्फ पंजाब की बसों की जांच किए जाने से कई सवाल खड़े होते हैं।
बताया गया है कि एनएचआरसी को पंजाब में कथित रूप से असुरक्षित बसों के संचालन को लेकर एक शिकायत प्राप्त हुई थी। इसके बाद प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
मामले को लेकर अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और पंजाब में बस सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है।















