देवास। इंदौर-देवास पश्चिमी (वेस्टर्न) रिंग रोड परियोजना के तहत अधिग्रहित की जा रही जमीनों के चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का आक्रोश अब सड़कों पर उतर आया है। करणी सेना परिवार के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने सोमवार को अपने-अपने ट्रैक्टरों के साथ राजधानी भोपाल कूच करने का ऐलान किया था। हालांकि, इंदौर से रवाना होने के कुछ ही देर बाद पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने उन्हें शिप्रा चौराहे पर बैरिकेड्स और डंपर लगाकर रोक दिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई और माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।


प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा वाटर कैनन (पानी की बौछारें) और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया। इस कार्रवाई के बाद आक्रोशित किसान बरलाई जागीर क्षेत्र में ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। करणी सेना परिवार के इंदौर जिलाध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने बताया कि प्रभावित किसान पिछले तीन वर्षों से अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन दे रहे थे। अब तक करीब 50 ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो किसानों को भोपाल जाकर मुख्यमंत्री से मिलने का लोकतांत्रिक रास्ता चुनना पड़ा, जिस पर प्रशासन ने बल प्रयोग किया।


बाजार मूल्य करोड़ों में और मुआवजा लाखों में: 39 गांवों की 4,442 हेक्टेयर जमीन प्रभावित

करणी सेना परिवार और किसान नेताओं ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में भारी अंतर का आरोप लगाया है। ऋषिराज सिंह सिसोदिया के अनुसार, ग्रेटर वेस्टर्न रिंग रोड परियोजना के दायरे में कुल 39 गांवों के 991 किसान आ रहे हैं, जिनकी लगभग 4,442 हेक्टेयर उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। उनका दावा है कि संबंधित ग्रामीण इलाकों में जमीन की वास्तविक बाजार कीमत एक करोड़ रुपये से लेकर साढ़े तीन करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक है, जबकि शासन की ओर से किसानों को मात्र 18 लाख रुपये से 42 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से बेहद कम मुआवजा दिया जा रहा है।


किसानों ने साफ किया है कि वे विकास कार्यों या 2028 के उज्जैन सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखकर बनाई जा रही इस महत्वाकांक्षी रिंग रोड परियोजना के विरोधी नहीं हैं। इंदौर और देवास के भारी यातायात को बाहर से निकालने के लिए यह सड़क बेहद जरूरी है, लेकिन इसके बदले में किसानों की आजीविका के मुख्य साधन यानी उनकी कीमती जमीनों का उचित और नियम अनुसार चार गुना मूल्य दिया जाना चाहिए। किसान नेताओं का यह भी आरोप है कि कई जगह किसानों पर मुकदमे दर्ज कर और प्रशासनिक दबाव बनाकर जबरन रजिस्ट्रियां कराने का प्रयास किया गया है।


आंसू गैस और वाटर कैनन से 7 से 10 किसान घायल, मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

प्रशासनिक कार्रवाई के बाद जमीनी स्तर पर स्थितियां काफी गंभीर हो गईं। करणी सेना परिवार के सदस्य रवींद्र कन्नौजिया ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा दागे गए आंसू गैस के गोले सीधे किसानों के बीच आकर गिरे, जिससे उनके पैर के पास एक गोला फटने से वे खुद घायल हो गए। वहीं, किसान राम मकवाना ने बताया कि पुलिसिया कार्रवाई में लगभग 8 से 10 किसानों को गंभीर चोटें आई हैं, जिनमें से कई किसानों को एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल ले जाना पड़ा। आंसू गैस के धुएं से कई वृद्ध किसानों का दम घुटने लगा, जबकि कुछ किसानों के हाथ-पैर और कंधों पर चोटें आई हैं।


दूसरी ओर, किसानों को हिरासत में लिए जाने की खबरों के बीच किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अधिग्रहित जमीनों का उचित और बाजार दर के अनुरूप चार गुना मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। किसानों ने चेतावनी दी है कि वे बरलाई जागीर में अपना धरना तब तक जारी रखेंगे जब तक कि शासन स्तर पर उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता।