ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करना 'कॉकरोच जनता पार्टी' को भारी पड़ गया है। शहर के ऐतिहासिक महाराज बाड़ा पर बिना अनुमति धरना देने और नारेबाजी करने के आरोप में पुलिस ने पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों सहित 15 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मध्य प्रदेश में इस राजनैतिक दल के खिलाफ दर्ज हुआ यह पहला आपराधिक प्रकरण है। प्रशासन द्वारा ऐन वक्त पर प्रदर्शन की अनुमति निरस्त किए जाने के बावजूद सोमवार को पार्टी के कार्यकर्ता और युवा सड़क पर धरने पर बैठ गए थे, जिसके बाद पुलिस को यह कानूनी कदम उठाना पड़ा।
महाराज बाड़ा पर एक घंटे तक चला प्रदर्शन और नारेबाजी
ग्वालियर के कोतवाली थाना प्रभारी विनोद विनायक करकरे से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को अनिकेत शिवहरे के नेतृत्व में लगभग 10 से 15 कार्यकर्ता और युवा महाराज बाड़ा पहुंचे थे। इन कार्यकर्ताओं ने बीच सड़क पर बैठकर नीट परीक्षा में हुई धांधली के विरोध में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। यह प्रदर्शन करीब एक घंटे तक जारी रहा, जिस दौरान प्रदर्शनकारियों ने व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। व्यस्ततम इलाका होने के कारण इस प्रदर्शन से यातायात और आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ा।
अनुमति निरस्त होने के बाद भी धरना जारी रखने पर हुई कार्रवाई
कोतवाली थाना पुलिस ने बताया कि जब मौके पर मौजूद पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों से धरना प्रदर्शन का आधिकारिक अनुमति पत्र मांगा, तो वे कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने में पूरी तरह असमर्थ रहे। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को यह भी अवगत कराया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए संबंधित एसडीएम (SDM) द्वारा इस प्रदर्शन की अनुमति पहले ही निरस्त की जा चुकी है। प्रशासनिक आदेश की जानकारी दिए जाने के बावजूद कार्यकर्ताओं ने अपना धरना समाप्त करने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अनिकेत शिवहरे (निवासी गाढ़वे की गोठ) समेत पार्टी के 15 अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ शासकीय आदेश की अवहेलना करने और धारा के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि शहर की शांति और कानून-व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए यह नियमानुसार कार्रवाई की गई है।
अंतिम समय में अनुमति रद्द करने से युवाओं में भारी आक्रोश
दूसरी ओर, इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद प्रदर्शन में शामिल युवाओं और छात्रों में प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष देखा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें प्रशासन द्वारा अनुमति निरस्त किए जाने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। युवाओं का कहना है कि प्रशासन ने हर बार की तरह इस बार भी अंतिम समय में जानबूझकर अनुमति कैंसल की, ताकि छात्रों की आवाज को दबाया जा सके। उनके आह्वान पर शहर भर से पीड़ित छात्र और युवा महाराज बाड़ा पर एकत्रित हुए थे। फिलहाल, इस पहली एफआईआर के दर्ज होने के बाद ग्वालियर के युवा वर्ग और छात्र संगठनों में तीखी नाराजगी व्याप्त है।




