नई दिल्ली। भारत के औद्योगिक क्षेत्र ने सितंबर 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में सालाना आधार पर 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र की 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी और बिजली एवं गैस आपूर्ति क्षेत्र की 11.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी त्वरित अनुमान के अनुसार, सितंबर 2026 में आईआईपी 124.3 पर पहुंच गया, जबकि सितंबर 2025 में यह 116.5 था। हालांकि अगस्त 2026 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 8 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जिसके मुकाबले सितंबर में वृद्धि की गति कुछ धीमी रही।

क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में खनन एवं उत्खनन सूचकांक 90.4, विनिर्माण सूचकांक 128.0, बिजली एवं गैस आपूर्ति सूचकांक 128.6 तथा जल आपूर्ति, सीवरेज एवं अपशिष्ट प्रबंधन सूचकांक 146.4 पर रहा।

विनिर्माण क्षेत्र में शामिल 23 उद्योग समूहों में से 17 ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर निर्माण क्षेत्र शामिल रहा, जिसमें 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माण क्षेत्र में 33.9 प्रतिशत और रबर एवं प्लास्टिक उत्पाद निर्माण क्षेत्र में 19.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

मोटर वाहन क्षेत्र में ऑटो कंपोनेंट्स, स्पेयर्स एवं एक्सेसरीज, यात्री वाहन और वाणिज्यिक वाहनों के उत्पादन ने वृद्धि को मजबूत आधार दिया। वहीं इलेक्ट्रिकल उपकरण क्षेत्र में स्विचगियर, सर्किट ब्रेकर, कंट्रोल एवं मीटर पैनल, यूपीएस सिस्टम तथा ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टर्स जैसे उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी देखी गई।

उपयोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार, सितंबर 2026 में प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक 111.6, पूंजीगत वस्तुओं का 153.4, मध्यवर्ती वस्तुओं (इंटरमीडिएट गुड्स) का 131.7 और अवसंरचना एवं निर्माण क्षेत्र का सूचकांक 133.0 रहा। वहीं उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं का सूचकांक 133.1 और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं का सूचकांक 111.8 दर्ज किया गया।

औद्योगिक उत्पादन में सबसे अधिक योगदान इंटरमीडिएट गुड्स, प्राइमरी गुड्स और कैपिटल गुड्स श्रेणियों का रहा, जो निवेश और उत्पादन गतिविधियों में मजबूती का संकेत माना जा रहा है।

इस बीच, सांख्यिकी मंत्रालय ने यह भी घोषणा की है कि मूल्य आधारित उत्पादन वाले कुछ उत्पाद समूहों के लिए थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के स्थान पर आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) को डिफ्लेटर के रूप में अपनाया जाएगा। इसका प्रभाव आईआईपी बास्केट में शामिल 463 में से 234 उत्पाद समूहों पर पड़ेगा, जिनका कुल भारांक लगभग 36 प्रतिशत है।

गौरतलब है कि मंत्रालय ने 1 जून 2026 को आधार वर्ष 2022-23 के साथ अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की नई शृंखला जारी की थी। सितंबर के आंकड़े संकेत देते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्र मजबूत गति बनाए हुए है, जो आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।