नई दिल्ली। दुनिया के सबसे समृद्ध रत्न भंडार वाले देशों में शामिल श्रीलंका में इस बात को लेकर बहस तेज हो रही है कि उसके प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले कारोबार का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका के खननकर्ताओं और स्थानीय व्यापारियों को जहां आय में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है, वहीं चीन समेत विदेशी खरीदारों की रत्न कारोबार में मौजूदगी बढ़ रही है।

सीलोन वायर न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के बीजिंग, शंघाई, शेनझेन, ग्वांगझू और हांगकांग जैसे बाजार श्रीलंका से प्राप्त उच्च मूल्य वाले नीलम और रंगीन रत्नों के प्रमुख गंतव्य बन गए हैं। चीनी खरीदार विशेष रूप से बिना तराशे या उपचारित किए गए प्राकृतिक रत्नों और प्रमाणित पत्थरों में रुचि रखते हैं। इनमें उच्च गुणवत्ता वाले नीले नीलम और माणिक प्रमुख हैं।

उद्योग से जुड़े कुछ जानकारों की चिंता केवल इस बात को लेकर नहीं है कि चीनी व्यापारी श्रीलंका से रत्न खरीद रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार अपने आप में सामान्य और वैध व्यावसायिक गतिविधि है। असली चिंता यह है कि रत्नों का अधिकांश मूल्य संवर्धन श्रीलंका से बाहर होने के कारण उनके अंतिम खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों को मिल सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यदि श्रीलंका अपने बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के निर्यात से अधिकतम लाभ प्राप्त करना चाहता है, तो उसे देश के भीतर रत्नों की कटाई, पॉलिशिंग, ब्रांडिंग, प्रमाणन और आभूषण निर्माण पर अधिक ध्यान देना होगा।

रत्नों के प्रसंस्करण और आभूषण निर्माण के प्रत्येक चरण से रोजगार, तकनीकी विशेषज्ञता, कर राजस्व और विदेशी मुद्रा अर्जित करने के अवसर पैदा होते हैं। यदि रत्नों की आगे की अधिकांश प्रक्रिया विदेशों में होती है, तो उनसे होने वाले बड़े मुनाफे का लाभ भी दूसरे देशों को मिलता है।

रत्न उद्योग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, खनन क्षेत्रों और उत्पादन केंद्रों के करीब से सीधे खरीदारी का चलन बढ़ रहा है। खरीदार इस तरीके से लागत कम करने की कोशिश करते हैं।

श्रीलंका दुनिया भर में अपने नीले नीलम, पदपरादशा नीलम, पीले नीलम, गुलाबी नीलम, सफेद नीलम, माणिक, स्पिनेल, गार्नेट, टूमलाइन, जिरकॉन, मूनस्टोन, अलेक्जेंड्राइट और कैट्स आई क्राइसोबेरील जैसे रत्नों के लिए जाना जाता है।

श्रीलंका के निर्यात विकास बोर्ड के अनुसार, देश उच्च गुणवत्ता वाले नीले नीलम के साथ-साथ लगभग 75 अन्य किस्मों के रत्नों का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करता है। बिना किसी कृत्रिम उपचार के प्राकृतिक रत्नों की गुणवत्ता के लिए श्रीलंका की वैश्विक पहचान ने उसे दुनिया भर के खरीदारों के लिए एक प्रमुख स्रोत बना दिया है।

सेरेंडिब ब्लू जेम डेटा हब की ओर से श्रीलंकाई उद्योग के स्रोतों का हवाला देते हुए प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में देश का रत्न और आभूषण निर्यात लगभग 430 मिलियन डॉलर रहा।