चेन्नई। तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित पेरियार लाइब्रेरी के लिए किताबों के चयन और खरीद को लेकर उठे विवाद के बीच राज्य सरकार ने सार्वजनिक पुस्तकालय विभाग में प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार ने आईएएस अधिकारी आर.वी. शाजीवना को सार्वजनिक पुस्तकालय विभाग का नया निदेशक नियुक्त किया है।
इससे पहले आईएएस अधिकारी जयंती सार्वजनिक पुस्तकालय विभाग के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही थीं। सरकार ने उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया है। हालांकि, वह शिक्षक भर्ती बोर्ड (टीआरबी) की अध्यक्ष बनी रहेंगी।
इस फैसले के जरिए सरकार ने सार्वजनिक पुस्तकालय विभाग की जिम्मेदारी को जयंती के अन्य प्रशासनिक दायित्वों से अलग कर दिया है।
यह प्रशासनिक फेरबदल ऐसे समय में हुआ है, जब कोयंबटूर की पेरियार लाइब्रेरी के लिए किताबों की खरीद और उनके चयन की प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है।
किताबों की खरीद प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद सार्वजनिक पुस्तकालय विभाग की कार्यप्रणाली भी जांच और आलोचना के दायरे में आ गई है। विवाद ने सरकारी पुस्तकालयों के लिए किताबों के चयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक निगरानी को लेकर व्यापक बहस शुरू कर दी है। हालांकि, सरकार ने विभाग के नेतृत्व में बदलाव किया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह फैसला सीधे तौर पर पेरियार लाइब्रेरी विवाद के कारण लिया गया है या व्यापक प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा है।
नवनियुक्त निदेशक आर.वी. शाजीवना के सामने अब तमिलनाडु के सार्वजनिक पुस्तकालयों का प्रशासन संभालने की जिम्मेदारी होगी। इसमें विभागीय नीतियों को लागू करना और पुस्तकालयों से जुड़े कार्यक्रमों की निगरानी करना शामिल है।
इस बीच, जयंती को टीआरबी अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने से संकेत मिलता है कि फिलहाल प्रशासनिक बदलाव सार्वजनिक पुस्तकालय विभाग तक ही सीमित रखा गया है।
पेरियार लाइब्रेरी में किताबों की खरीद को लेकर विवाद के बीच अब सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विवादित खरीद प्रक्रिया की समीक्षा की जाती है या नहीं और भविष्य में सरकारी पुस्तकालयों के लिए किताबों के चयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।













