भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों से राज्य के 2 लाख से अधिक शासकीय कर्मचारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) पर लगी रोक को हटाने की बड़े पैमाने पर तैयारी शुरू कर दी है। इन कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए 'भर्ती पदोन्नति नियम 2025' के तहत वर्ष 2024 से 2029 तक यानी आगामी पांच वर्षों में रिक्त होने वाले पदों और उन पर पदोन्नति के लिए उपलब्ध योग्य कर्मचारियों की सूची को उनकी गोपनीय चरित्रावली (सीआर) के साथ अपडेट रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस प्रक्रिया के दायरे में प्रथम श्रेणी के अधिकारियों से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक के सभी शासकीय कर्मचारी शामिल होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने सोमवार को राज्य के 20 प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में प्रमोशन को लेकर आरक्षण का एक नया फॉर्मूला दिया गया है, ताकि फिलहाल रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को गति दी जा सके। नए फॉर्मूले के अनुसार, जितने भी पद खाली होंगे, उन्हें अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 20 प्रतिशत और शेष को अनारक्षित भागों में विभाजित किया जाएगा। सरकार का स्पष्ट रुख है कि वर्तमान में पदोन्नति पर माननीय कोर्ट की कोई सीधी रोक नहीं है, इसलिए इस प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है। भविष्य में सुप्रीम कोर्ट का जो भी अंतिम फैसला होगा, उसके अनुसार खाली पदों को नियमित रूप से भरा जाएगा।


हालांकि, सरकार के इस नए लोक सेवा प्रमोशन नियम-2025 को लेकर कर्मचारी संगठनों के बीच मतभेद और विरोध भी उभरकर सामने आ रहे हैं। इस प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं और इसके संभावित प्रभावों को निम्न बिंदुओं के तहत समझा जा सकता है:


  • सामान्य वर्ग की चिंताएं और कोर्ट में चुनौती: सामान्य वर्ग से जुड़े कर्मचारी यूनियनों का दावा है कि पदोन्नति नियम 2025 के वर्तमान प्रावधानों के आधार पर यदि पदोन्नतियां की जाती हैं, तो सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा, जिसकी भरपाई आगामी 15 से 20 वर्षों में भी संभव नहीं होगी। इसी आपत्ति के चलते सामान्य वर्ग द्वारा इन नियमों को कोर्ट में चुनौती दी गई है।
  • संवर्गों में असंतुलन की स्थिति: यूनियनों के अनुसार, मूल समस्या यह है कि लंबे समय से पदोन्नति न होने के कारण लगभग हर प्रमोशन चैनल के शीर्ष दो-तीन संवर्गों में लगभग शत-प्रतिशत आरक्षित वर्ग के ही अधिकारी और कर्मचारी पदस्थ हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में यदि अब पदोन्नति होती है, तो उच्च संवर्गों में केवल आरक्षित वर्ग के ही लोग प्रमोट होंगे, क्योंकि जिस संवर्ग से पदोन्नति होनी है, वहां वर्तमान में सामान्य वर्ग का कोई अधिकारी उपलब्ध ही नहीं है।
  • मंत्रालय और विभागों की जमीनी स्थिति: उदाहरण के तौर पर, मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी के पदों पर वर्तमान में सभी अधिकारी आरक्षित वर्ग से हैं, जिसके चलते आगामी समय में सभी डिप्टी सेक्रेटरी आरक्षित वर्ग के ही बनेंगे। इसी तरह, सभी अनुभाग अधिकारी आरक्षित वर्ग के होने से वे ही अंडर सेक्रेटरी के पदों पर प्रमोट होंगे। कमोबेश यही स्थिति राज्य के अन्य सभी शासकीय विभागों में बनी हुई है, जिससे सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को केवल निचले पदों पर ही पदोन्नति मिलने की संभावना है।


विदित हो कि 30 अप्रैल 2016 को हाईकोर्ट द्वारा पुराने प्रमोशन नियमों को निरस्त किए जाने और 12 मई 2016 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा यथास्थिति (स्टे) दिए जाने के बाद से बीते 9 सालों में राज्य के करीब 1 लाख कर्मचारी बिना किसी पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। प्रदेश में हर साल औसतन 15 से 16 हजार अधिकारी-कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही सेवामुक्त हो रहे हैं। लंबे समय तक पदोन्नतियां न होने के कारण शासकीय विभागों में उच्च पदों पर अधिकारियों की भारी कमी हो गई है, जिससे प्रशासनिक कार्यकुशलता और दक्षता पर भी विपरीत असर पड़ा है। कई महत्वपूर्ण विभागों में वर्तमान में संविदा पर अधिकारियों की सेवाएं लेकर काम चलाया जा रहा है।


नए पदोन्नति नियमों को 19 जून 2025 को अधिसूचित (नोटिफाई) किया गया है। इन नियमों की प्रस्तावना में ही स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में दायर राज्य सरकार की एसएलपी क्रमांक 13954/2016 के अंतिम फैसले के अद्यधीन रहेगी। इन नियमों को बनाने का मुख्य उद्देश्य पदोन्नति देने के साथ-साथ अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारियों को समान अवसर प्रदान करना है।


इस बार की पदोन्नति प्रक्रिया में कुछ ऐसे प्रशासनिक निर्देश दिए गए हैं, जो प्रदेश में पहली बार लागू किए जा रहे हैं:


  • वर्ष में दो बार अपडेशन: कर्मचारियों की सीनियारिटी लिस्ट (वरिष्ठता सूची) को अब एक बार बनाकर फ्रीज नहीं किया जाएगा। इसे हर साल जनवरी और जुलाई के महीनों में अनिवार्य रूप से अपडेट किया जाएगा।
  • 5 साल की सीआर एडवांस में तैयार: सभी संबंधित विभागों को अपने कर्मचारियों की पिछले 5 वर्षों की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) को एडवांस में पूरी तरह अपडेट और तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
  • इन 20 विभागों में काम शुरू: इस नई पदोन्नति प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने के लिए जिन 20 प्रमुख विभागों में काम शुरू किया गया है, उनमें लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई), जल संसाधन, जनजातीय कार्य, परिवहन, कृषि, उद्यानिकी, सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी), उद्योग, एमएसएम