मुंबई। तेल की कीमतों में मजबूती और वैश्विक बॉन्ड की बिकवाली के बाद जोखिम से बचने की भावना के चलते गुरुवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी 50 में 1.64 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी50 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत गिरकर 23,0631.0 पर बंद हुआ।

दिन के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,828.25 से 555.85 अंक यानी 0.74 प्रतिशत गिरकर 74,272.40 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय यह 1,264.33 अंक यानी 1.68 प्रतिशत गिरकर 73563.92 के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया।

वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,446.80 से 225 अंक यानी 0.95 प्रतिशत गिरकर 23,221.80 पर खुला और इंट्रा-डे ट्रेडिंग में एक समय इसने 400.65 अंक यानी 1.70 प्रतिशत गिरकर 23,046.15 का निम्नतम स्तर छुआ।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 2.25 प्रतिशत और 1.53 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो गुरुवार के सत्र में सभी सेक्टर लाल निशान में ट्रेड करते हुए दिखाई दिए। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन सबसे खराब रहा, जिनमें 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, निफ्टी मेटल में 1.96 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 1.57 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.13 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 1.10 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 1.08 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।

निफ्टी 50 इंडेक्स में सिप्ला, ओएनजीसी और एनटीपीसी को छोड़कर बाकी सभी शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इनमें एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

इस दौरान, व्यापक बिकवाली के चलते एक ही सत्र में निवेशकों की लगभग 5 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति का सफाया हो गया। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के 485 लाख करोड़ रुपए से घटकर 480.95 लाख करोड़ रुपए रह गया।

गुरुवार के कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी आई, लेकिन ये मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी रहीं।

वहीं, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी से उछाल आया, जिससे इक्विटी निवेशकों के बीच नई चिंताएं पैदा हुईं और जोखिम भरी संपत्तियों का सापेक्ष आकर्षण कम हो गया।

गुरुवार (24 सितंबर) को देश के शीर्ष स्टॉक एक्सचेंज ने बीएसई पर अपना डेब्यू किया, जो एक ऐतिहासिक दिन था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के शेयर लिस्टिंग के दौरान 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,817 रुपए पर बंद हुए, जो इसके आईपीओ प्राइस बैंड 1,785 रुपए से अधिक है।

एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच बाजार पर दबाव बना, जो ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक जोखिमों के बढ़ने का संकेत है।

महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर बनी अनिश्चितताओं के कारण ब्याज दरों की चाल को लेकर चिंताएं बढ़ गईं, जिससे निवेशकों का रुख जोखिम लेने के बजाय सावधानी बरतने वाला हो गया।

एक्सपर्ट ने बताया कि घरेलू स्तर पर, कमीशन स्ट्रक्चर की रेगुलेटरी समीक्षा और मुनाफे पर इसके असर को लेकर चिंताओं के कारण इंश्योरेंस और बैंकिंग सेक्टर कमजोर बने रहे। बाजार अभी अहम साइकोलॉजिकल सपोर्ट लेवल के आस-पास बना हुआ है।

एक्सपर्ट के मुताबिक, कोई नई सकारात्मक खबर न होने की वजह से, निकट भविष्य में बाजार का मूड सतर्क रह सकता है। इससे वैल्यूएशन में बढ़ोतरी सीमित हो सकती है और आगे चलकर बाजार के प्रदर्शन के लिए कमाई में बढ़ोतरी ही मुख्य कारक बन सकती है।