बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के जनजातीय बहुल बैहर विधानसभा क्षेत्र में अति-संवेदनशील बैगा आदिवासी समुदाय के बच्चों की मौतों के आंकड़ों को लेकर क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक संजय उईके ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधायक ने क्षेत्र में बैगा बच्चों की लगातार हो रही मौतों, कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं के बदहाल रवैये पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए मोहन यादव सरकार से पूरे मामले पर पारदर्शी 'श्वेत पत्र' (White Paper) जारी करने की मांग की है।
5 महीने में 43 बच्चों की मौत का दावा; 15 पीड़ित परिवारों को अब तक नहीं मिली सहायता राशि
विधायक संजय उईके ने आरोप लगाया है कि बैहर विधानसभा क्षेत्र में बीते पांच महीनों के दौरान 43 बैगा बच्चों की असमय मृत्यु हुई है। हालांकि, शासन-प्रशासन द्वारा केवल 28 मृतक बच्चों के परिवारों को ही सहायता राशि प्रदान की गई है, जबकि 15 पीड़ित बैगा परिवार आज भी सरकारी मदद के इंतजार में भटक रहे हैं। उन्होंने शेष 15 पीड़ित परिवारों को भी बिना किसी विलंब के तत्काल अनुग्रह सहायता राशि जारी करने की पुरजोर मांग की है।
श्वेत पत्र के माध्यम से इन बिंदुओं पर मांगी गई विस्तृत जानकारी
विधायक संजय उईके ने सरकार से आग्रह किया है कि वर्ष 2026 में बैगा बहुल गांवों में बच्चों की मौतों के आंकड़ों को गांववार और आयु वर्ग के हिसाब से सार्वजनिक किया जाए: बच्चों की मौत के पीछे की वास्तविक मेडिकल व सरकारी वजहें, मौतों से पूर्व उन्हें दिए गए इलाज, स्वास्थ्य जांच की तिथि व स्थान की पूरी जानकारी दी जाए।
क्षेत्र में गंभीर कुपोषित (SAM) व मध्यम कुपोषित (MAM) बच्चों की कुल संख्या, आंगनबाड़ियों द्वारा दी जाने वाली पोषण सामग्री का विवरण और बैगा विकास अभिकरण (BDA) के लिए स्वीकृत व खर्च की गई वित्तीय राशि का लेखा-जोखा मांगा गया है। प्रभावित बैगा टोलों से निकटतम स्वास्थ्य केंद्र की दूरी, एम्बुलेंस सेवाओं, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (MMU) तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित मेडिकल कैंपों की वास्तविक स्थिति का ब्यौरा देने की मांग की गई है। बैगा बहुल दुर्गम क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण, नियमित टीकाकरण अभियानों की स्थिति और भविष्य में बाल मृत्यु दर को रोकने के लिए सरकार द्वारा बनाई गई ठोस रणनीति का विवरण भी मांगा गया है।
शिक्षा, योजनाओं का क्रियान्वयन और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
स्वास्थ्य और पोषण के साथ-साथ विधायक ने बैगा समुदाय के बच्चों की शैक्षणिक स्थिति, स्कूलों व छात्रावासों में नामांकन, ड्रॉप-आउट दर, छात्रवृत्ति तथा अन्य सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का आधिकारिक आंकड़ा भी सामने रखने को कहा है। उन्होंने शासन द्वारा गठित जांच समितियों की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि श्वेत पत्र जारी होने से बैगा बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्थाओं की वास्तविक धरातलीय स्थिति सरकार, जनप्रतिनिधियों और जनता के सामने साफ होगी, जिससे भविष्य में सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे।











