सतना, सजल कुमार रजक। वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में आधुनिक कृषि पद्धतियों पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में सतना जिले के सितपुर और बरैसधिया में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसका विस्तार आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तक है।
पराली जलाने से राहत और बेहतर प्रबंधन के तरीके
कार्यक्रम में किसानों को समझाया गया कि खेतों में पराली जलाने से जहां एक तरफ पर्यावरण और हवा की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचता है, वहीं इसके उचित प्रबंधन से उपयोगी संसाधन तैयार किए जा सकते हैं। इससे प्रदूषण पर लगाम कसने के साथ कृषि अवशेषों से मुनाफा कमाने के रास्ते खुलते हैं।
किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक का इजाफा
आदर्श किसान खेत कार्यक्रम से जुड़े किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आधुनिक तौर-तरीके अपनाने से उनकी आमदनी में 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, यह आंकड़ा पूरी तरह किसानों के व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है।
'किसान दीदी' दे रही हैं आधुनिक कृषि का प्रशिक्षण
इस मुहिम के तहत 'किसान दीदी' द्वारा किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें खेती के नए तरीकों, संसाधनों के सही इस्तेमाल और टिकाऊ कृषि कार्यों के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि 'खेती वही, तरीके नए, कमाई बेहतर' के संकल्प को साकार किया जा सके।
पर्यावरण संरक्षण के साथ मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी प्रशिक्षण, पराली का उचित प्रबंधन और किसानों का सीधा बाजार से जुड़ाव पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ ग्रामीण भारत की आर्थिक तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है।
















