लखनऊ। बुंदेलखंड क्षेत्र में बसा महोबा जिला न सिर्फ इतिहास और संस्कृति के लिए जाना जाता है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी इसकी खास अहमियत है। जिले में कुल 2 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें महोबा और चरखारी सीट शामिल हैं। दोनों ही सीटें हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं और फिलहाल दोनों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है।उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में महोबा सीट 230वें नंबर पर है। यह महोबा जिले में स्थित एक सामान्य, यानी अनारक्षित सीट है। यहां से मौजूदा विधायक राकेश कुमार गोस्वामी हैं, जो भारतीय जनता पार्टी से हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी।
पिछले चुनाव में इस सीट पर लगभग 3,16,799 पंजीकृत मतदाता थे और मतदान करीब 65.44 प्रतिशत रहा था। 2022 के चुनाव में भाजपा के राकेश कुमार गोस्वामी को करीब 94,490 वोट मिले थे, जो कुल वोटों का 45.61 प्रतिशत था। उन्होंने समाजवादी पार्टी के मनोज तिवारी को 43,447 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।
जिले की दूसरी सीट चरखारी है, जो 231वें नंबर की सीट है। यह भी एक सामान्य सीट है और महोबा जिले में ही स्थित है। यहां से भाजपा के बृजभूषण राजपूत विधायक हैं, जो 18वीं विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
पिछले चुनाव में इस सीट पर लगभग 3,46,471 पंजीकृत मतदाता थे और 64.43 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2022 में बृजभूषण राजपूत ने 1,02,051 वोट यानी 45.75 प्रतिशत वोट हासिल कर समाजवादी पार्टी के रामजीवन यादव को करीब 41,881 वोटों से हराया था।
महोबा जिले का इतिहास बेहद गौरवशाली है। इसे 11 फरवरी 1995 को हमीरपुर जिले से अलग करके स्वतंत्र जिले के रूप में स्थापित किया गया था। यह चित्रकूट मंडल के अंतर्गत आता है और यहां 3 तहसीलें हैं, जिनमें महोबा, चरखारी और कुलपहाड़ शामिल हैं।
इसका प्राचीन नाम 'महोत्सव नगर' या महोत्सवपुर था, जिसका अर्थ 'उत्सवों का शहर' है। इसे केकेईपुर, पाटनपुर और रतनपुर नामों से भी जाना जाता रहा है।
यह क्षेत्र चंदेल राजाओं की सैन्य और सांस्कृतिक राजधानी रहा है। चंदेल राजा यशोवर्मन, धंगदेव और परमर्दिदेव (परमाल) यहां के प्रसिद्ध शासक रहे हैं। महोबा को प्रख्यात योद्धा आल्हा और ऊदल की वीरता के लिए जाना जाता है। ये दोनों वीर सेनापति चंदेल राजा परमाल के सामंत थे, जिन्होंने 1182 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान के विरुद्ध महोबा की रक्षा के लिए ऐतिहासिक युद्ध लड़ा था।
महोबा अपनी खूबसूरत झीलों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां विजय सागर, मदन सागर और कल्याण सागर जैसी ऐतिहासिक झीलें हैं। गोखार पहाड़ी यहां का प्रमुख दर्शनीय स्थल है, जहां 24 जैन तीर्थंकरों की चट्टान-कट प्रतिमाएं, पवित्र राम-कुंड और सीता-रसोई गुफा स्थित हैं।
9वीं शताब्दी का प्रसिद्ध ग्रेनाइट सूर्य मंदिर प्रतिहार वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है। इसके अलावा चंद्रिका देवी मंदिर और रहिल्ला सागर सूर्य मंदिर भी प्रमुख आकर्षण हैं।
संस्कृति की बात करें तो महोबा का सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मेला 'कजली मेला' है, जो आल्हा-ऊदल की गाथाओं और स्थानीय संस्कृति से जुड़ा हुआ है। खान-पान में यहां का 'देशावरी पान' पूरे भारत में अपनी विशेष खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर है। इसके अलावा बैंगन का भर्ता और उबले बेर भी काफी प्रसिद्ध हैं।
परिवहन के लिहाज से महोबा राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-34 से जुड़ा हुआ है और रेलमार्ग द्वारा दिल्ली, ग्वालियर और मुंबई से जुड़ा है। इसका निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो है, जो लगभग 65 किमी दूर है।














