लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं, जिनमें माधौगढ़, कालपी और उरई के नाम शामिल हैं। ये तीनों सीटें जिले की सियासत की दिशा तय करती हैं। उरई इस जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है और कानपुर-झांसी नेशनल हाईवे 27 पर स्थित है। इतिहास में यह शहर कभी मराठा राज्यपाल का निवास रहा है, हालांकि जिला मुख्यालय हमेशा से उरई ही रहा है।
माधौगढ़ जालौन जिले की एक प्रमुख विधानसभा सीट है। यह एक तहसील भी है और सामान्य अनारक्षित सीट है। उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में यह 219वें नंबर पर आती है। 2022 के चुनाव में इस सीट पर लगभग 4,45,421 पंजीकृत मतदाता थे।
यहां से मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मूलचंद्र निरंजन हैं, जिन्हें मूलचंद सिंह के नाम से भी जाना जाता है। वे 18वीं विधानसभा में भाजपा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और 2022 में निर्वाचित हुए थे। उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी शीतल कुशवाहा थीं।
कालपी जिले की एक ऐतिहासिक तहसील और विधानसभा क्षेत्र है। यह भी सामान्य अनारक्षित सीट है और जालौन जिले में आती है। 403 में से यह 220वीं सीट है। पिछले चुनाव में यहां लगभग 3,94,653 पंजीकृत मतदाता थे।
2022 के विधानसभा चुनाव में यहां से समाजवादी पार्टी के विनोद चतुर्वेदी ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने करीब 29.48 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। उन्होंने निषाद पार्टी के छोटे सिंह को हराया था। छोटे सिंह को करीब 28.49 प्रतिशत वोट मिले थे। यहां मतदान प्रतिशत 60.05 रहा था।
उरई जालौन जिले का प्रशासनिक मुख्यालय और प्रमुख शहर है। उरई विधानसभा सीट का नंबर 221 है। यहां से मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी के गौरी शंकर वर्मा हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के दयाशंकर वर्मा को हराकर जीत हासिल की थी।
2011 की जनगणना के अनुसार, जालौन जिला आबादी के लिहाज से उत्तर प्रदेश में 57वें नंबर पर है। जिले में शहरी आबादी का प्रतिशत 24.8 है, जबकि राज्य में औसत शहरी आबादी 22.3 प्रतिशत है।
जनसंख्या घनत्व की बात करें तो जालौन में 370 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर रहते हैं, जो राज्य के औसत 829 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से काफी कम है। लिंग अनुपात के मामले में जालौन 865 के आंकड़े के साथ 63वें स्थान पर है।
साक्षरता के मामले में जालौन की स्थिति काफी बेहतर है। 73.7 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ यह जिला प्रदेश में 11वें स्थान पर है, जो राज्य के औसत 67.7 प्रतिशत से ज्यादा है। जिले की दशकीय वृद्धि दर 16.2 प्रतिशत है, जो राज्य की औसत 20.2 प्रतिशत से कम है।
जिले में कुल 1,151 गांव हैं, जिनमें से 209 निर्जन हैं। माधौगढ़ तहसील में सबसे ज्यादा 223 बसे हुए गांव हैं, जबकि उरई तहसील में सबसे कम 128 बसे हुए गांव हैं। जिले में 10 कस्बे हैं और सभी वैधानिक शहर हैं। 2001 की जनगणना के बाद कोई नया वैधानिक शहर नहीं जोड़ा गया है। जिले में 2,88,338 परिवार हैं, जो राज्य के कुल परिवारों का 0.9 प्रतिशत है। यहां घरों का औसत आकार 5.9 व्यक्ति है।













