सतना, अंबिका केशरी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में किए गए शिक्षकों के स्थानांतरण के बाद कार्यमुक्त किए जाने की प्रक्रिया में लापरवाही के मामले सामने आने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला सतना जिले के नागौद विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय रेरुआ कला से सामने आया है, जहां पदस्थ शिक्षिका अरुणा सोनारे ने समय पर कार्यमुक्त नहीं किए जाने से आहत होकर आत्महत्या की चेतावनी दी है।


जानकारी के अनुसार, अरुणा सोनारे का स्थानांतरण सतना जिले से पांढुर्ना जिले के चांगोवा प्राथमिक विद्यालय में किया गया है। विभागीय आदेश के मुताबिक उन्हें 6 जुलाई तक नवीन पदस्थापना स्थल पर पहुंचकर आमद दर्ज करानी थी। आरोप है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद विद्यालय की प्रधानाध्यापिका और संबंधित संकुल की प्राचार्य ने उन्हें अब तक कार्यमुक्त नहीं किया, जिससे वे निर्धारित समय सीमा के भीतर नई संस्था में कार्यभार ग्रहण नहीं कर सकीं।


शिक्षिका का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधन से कार्यमुक्त किए जाने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद अब उनके सामने सेवा संबंधी जटिलताएं उत्पन्न हो गई हैं। इसी मानसिक तनाव के चलते उन्होंने आत्महत्या जैसी गंभीर चेतावनी दी है।


इस घटनाक्रम ने स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग जहां स्थानांतरण आदेश जारी कर समय-सीमा तय करता है, वहीं अधीनस्थ स्तर पर आदेशों का पालन नहीं होने से कर्मचारी परेशान हो रहे हैं। यदि शिक्षिका के लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला माना जाएगा।


अब जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि विभाग मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर शिक्षिका को नियमानुसार कार्यमुक्त कराने के साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करेगा।