भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बारिश के बाद मौसमी वायरल का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, ठंड और कमजोरी के साथ-साथ अब ऐसे मरीज भी पहुंच रहे हैं, जिनका बुखार उतरने के बाद भी उन्हें तेज कमर दर्द और पेट में संक्रमण (Gastrointestinal Infection) की समस्या बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह फ्लू के बाद होने वाली पोस्ट-वायरल जटिलताएं (Post-viral complications) हो सकती हैं।


बुखार के बाद क्यों बढ़ रही हैं समस्याएं?

गांधी मेडिकल कॉलेज के सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत श्रीवास्तव के अनुसार: वायरल संक्रमण के दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) काफी कमजोर हो जाती है। ढीली पड़ी इम्यूनिटी के कारण दूसरा वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण शरीर पर आसानी से हमला कर देता है। इसके चलते मांसपेशियों व कमर में दर्द, अत्यधिक थकान और सांस की नली में सूजन आ जाती है। यदि बुखार उतरने के कुछ दिनों बाद दोबारा तेज बुखार आए, सीने में दर्द महसूस हो या सांस लेने में तकलीफ हो, तो इसे केवल सामान्य कमजोरी मानकर अनदेखा न करें। तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।


भोपाल बनाम दिल्ली: H-3N-2 के मामले ज्यादा

भोपाल के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू (H1N1) के गंभीर मरीज कम हैं। ओपीडी में सामान्य वायरल और H3N2 के मरीज ज्यादा आ रहे हैं, जबकि आईसीयू (ICU) में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या नगण्य है। दिल्ली और दक्षिण भारत की तुलना में भोपाल का मौजूदा कम तापमान और कम आर्द्रता वाला मौसम H1N1 (स्वाइन फ्लू) के पनपने के लिए ज्यादा अनुकूल नहीं है, इसलिए यहाँ H3N2 का प्रभाव अधिक देखा जा रहा है।


वायरल बुखार के प्रमुख लक्षण

  1. मांसपेशियों, जोड़ों और सिर में तेज दर्द।
  2. अचानक या धीरे-धीरे शरीर का तापमान बढ़ना।
  3. गले में खराश, दर्द या चुभन महसूस होना।
  4. नाक बहना, बंद नाक और लगातार छींकें आना।
  5. अत्यधिक थकान और कमजोरी रहना।
  6. मितली, उल्टी, दस्त या पेट खराब होना।
  7. त्वचा पर लाल चकत्ते या दाने उभरना।


विशेषज्ञों की सलाह: क्या करें और क्या न करें?

वायरल इंफेक्शन में बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक या कोई भी पेनकिलर लेने से बचें। शरीर को फ्लू से पूरी तरह रिकवर (उबरने) होने में 2 से 4 सप्ताह तक का समय लग सकता है। इसलिए पर्याप्त आराम करें और खूब पानी व तरल पदार्थ लें।