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एशियन गेम्स- महिला क्रिकेट टीम ने भारत को गोल्ड दिलाया

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ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब बनने के लिए भारत को उद्योग स्तर के दृष्टिकोण को अपनाना होगा: एक्सपर्ट्स

ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब बनने के लिए भारत को उद्योग स्तर के दृष्टिकोण को अपनाना होगा: एक्सपर्ट्स

नई दिल्ली। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम में बदलने के लिए पूरे उद्योग स्तर के दृष्टिकोण अपनाना होगा। यह बयान बुधवार को जारी आधिकारिक फैक्टशीट में दिया गया।सेमीकॉन इंडिया 2026 में उद्योग जगत के जुड़े लीडर्स ने कहा कि इकोसिस्टम के विभिन्न हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाले अलग-अलग संगठन अंततः एक ही साझा उद्देश्य की दिशा में काम कर रहे हैं और वह है भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र का निर्माण करना। बयान में कहा गया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। इसमें बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार हो रहा है और वैश्विक कंपनियां भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। इससे यह इकोसिस्टम अभूतपूर्व गति से विकसित हो रहा है। लीडर्स ने आगे कहा कि विकास के अगले चरण को अकेले किसी एक क्षेत्र के दम पर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, कंपोनेंट्स, मटेरियल्स, डिजाइन, पैकेजिंग और अंतिम उपयोग वाले एप्लिकेशन तेजी से एक-दूसरे पर निर्भर हो रहे हैं। ऐसे में सफलता केवल तकनीकी क्षमताओं पर ही नहीं, बल्कि उद्योग के विभिन्न हिस्सों के बीच सहयोग पर भी निर्भर करेगी। चर्चा के दौरान टेक्नोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रों के बीच बढ़ते तालमेल को प्रमुख विषय के रूप में सामने रखा गया। उद्योग विशेषज्ञों के हवाले से बयान में कहा गया, “चिप्स को अलग-थलग रहकर नहीं, बल्कि डिवाइस, उत्पादों और सिस्टम में उनके एकीकरण के जरिए मूल्य मिलता है। फैब्रिकेशन में प्रगति के लिए सहायक मटेरियल और उपकरणों की जरूरत होती है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग पैकेजिंग, टेस्टिंग और व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमताओं पर निर्भर करती है।” उद्योग की इस आपस में जुड़ी प्रकृति को देखते हुए पूरी वैल्यू चेन में मजबूत संपर्क और अधिक व्यवस्थित सहयोग की जरूरत है। उद्योग जगत के नेताओं ने एक अधिक स्थायी कम्युनिटी मैकेनिज्म बनाने के विचार पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य लगातार संवाद को बढ़ावा देना, विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करना और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सामूहिक कार्रवाई को आगे बढ़ाना होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि मौजूदा संगठनों को अपनी ताकत के आधार पर एक साझा मंच तैयार करना चाहिए, जहां वे विभिन्न क्षेत्रों और वैल्यू चेन से जुड़े साझा मुद्दों पर मिलकर काम कर सकें। चर्चा में व्यापक “सिलिकॉन टू सिस्टम्स” विजन को भी मजबूती मिली। इसके तहत डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस मिलकर एक मजबूत और अधिक लचीला इकोसिस्टम तैयार करते हैं। सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया, जिनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल थीं। इन कंपनियों ने भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में बढ़ती वैश्विक रुचि को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के दौरान मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन, पैकेजिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी), लॉजिस्टिक्स और स्किलिंग के क्षेत्र में 56 एमओयू, रणनीतिक पहल और उद्योग संबंधी घोषणाएं भी हुईं। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाएं और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करने में मदद कर रहे हैं। सरकार ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें से सितंबर 2026 तक पांच कमर्शियल सेमीकंडक्टर यूनिट पहले ही परिचालन में आ चुकी हैं।

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भारत के चिपइन सेंटर से जुड़े 1 लाख से अधिक इंजीनियर, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मिली नई ताकत

भारत के चिपइन सेंटर से जुड़े 1 लाख से अधिक इंजीनियर, सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मिली नई ताकत

नई दिल्ली। भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ी प्रगति करते हुए चिपइन सेंटर ने सी2एस (चिप्स टू स्टार्टअप) कार्यक्रम और डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के तहत देशभर के 1 लाख से अधिक इंजीनियरों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़ा है। सरकार के अनुसार, ये इंजीनियर 500 से अधिक संगठनों से जुड़े हैं, जिनमें 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं।इन इंजीनियरों और संस्थानों को उन्नत चिप डिजाइन टूल्स, चिप डिजाइन एवं फेब्रिकेशन सेवाओं तथा विशेष प्रशिक्षण सुविधाओं तक पहुंच प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमता को मजबूत करना और कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इन संस्थानों और स्टार्टअप्स ने मिलकर अब तक 300 से अधिक चिप डिजाइन विकसित किए हैं, जिन्हें भारत और विदेशों की फाउंड्री में निर्माण के लिए भेजा गया है। इसके अलावा चिप डिजाइन टूल्स का उपयोग 4 करोड़ घंटे से अधिक किया जा चुका है। सरकार ने कहा कि इस पहल के परिणामस्वरूप चिपइन सेंटर में दुनिया के सबसे बड़े केंद्रीकृत चिप डिजाइन उपयोगकर्ता समूहों में से एक विकसित हुआ है, जो भारत के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की क्षमता को दर्शाता है। चिप्स टू स्टार्टअप (सी2एस) कार्यक्रम छात्रों, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सेमीकंडक्टर डिजाइन कौशल विकसित करने पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य बड़ी संख्या में प्रशिक्षित चिप डिजाइनर तैयार करना और देश की इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन क्षमता को मजबूत बनाना है। वहीं, सरकार की डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना ने वीडियो सर्विलांस, ड्रोन डिटेक्शन, ऊर्जा मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) जैसे क्षेत्रों में घरेलू चिप डिजाइन परियोजनाओं को समर्थन प्रदान किया है। सरकार ने बताया कि सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत अब तक 6 राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं में 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें से तीन इकाइयों ने व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है। सरकार के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया 2026 ने यह दिखाया कि भारत केवल भविष्य की योजनाएं ही नहीं बना रहा, बल्कि डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और संबंधित प्रौद्योगिकियों में वास्तविक क्षमताएं भी तेजी से विकसित कर रहा है। बयान में कहा गया है कि सेमीकंडक्टर उद्योग केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है। इसके लिए चिप डिजाइनर, फेब्रिकेशन यूनिट, पैकेजिंग एवं परीक्षण सुविधाएं, उपकरण और सामग्री आपूर्तिकर्ता, शोध संस्थान, स्टार्टअप्स, सिस्टम कंपनियां और कुशल कार्यबल की आवश्यकता होती है। सेमीकॉन इंडिया 2026 ने इन सभी घटकों को एक मंच पर लाकर यह संकेत दिया है कि भारत का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम अब पूरी वैल्यू चेन में विकसित हो रहा है और स्वदेशी नवाचार को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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एआई से 2030 तक दुनिया के खत्म होने का 'जीरो' प्रतिशत खतरा: एनवीडिया प्रमुख जेन्सेन हुआंग

एआई से 2030 तक दुनिया के खत्म होने का 'जीरो' प्रतिशत खतरा: एनवीडिया प्रमुख जेन्सेन हुआंग

नई दिल्ली। एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जेन्सेन हुआंग ने उन आशंकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) वर्ष 2030 तक दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी स्थिति के पैदा होने की संभावना 'जीरो प्रतिशत' है।सीबीएस न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में हुआंग ने कहा कि एआई के कारण दुनिया के खत्म होने जैसी भविष्यवाणियां तर्कहीन हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसी चेतावनियों के पीछे राजनीतिक, व्यावसायिक या सिर्फ ध्यान आकर्षित करने की मंशा हो सकती है। हुआंग ने कंपनियों से एआई विकास की गति तेज करने का आह्वान किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उत्पादों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को ऐसे एआई सिस्टम जारी नहीं करने चाहिए जो पूरी तरह तैयार या सुरक्षित न हों। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रौद्योगिकी जगत के कई अन्य नेताओं ने अधिक शक्तिशाली एआई प्रणालियों के विकास की रफ्तार को नियंत्रित करने और सुरक्षा उपायों को मजबूत बनाने की वकालत की है। हाल के दिनों में एंथ्रोपिक के सीईओ दारियो अमोदेई, ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों ने उन्नत एआई प्रणालियों को लेकर अधिक सख्त सुरक्षा उपायों की मांग की थी। हुआंग ने कहा कि उद्योग को एआई का विकास इस तरह करना चाहिए जिससे अमेरिका की समृद्धि को बढ़ावा मिले और साथ ही उत्पादों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में सेल्सफोर्स ड्रीमफोर्स सम्मेलन में भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए थे। वहां उन्होंने एआई के लिए अलग से नए कानून बनाने का विरोध किया और कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करना मुख्य रूप से प्रत्येक कंपनी की इंजीनियरिंग और विकास प्रक्रिया की जिम्मेदारी है। हाल ही में लॉस एंजिलिस में आयोजित ऑल-इन समिट में बोलते समय हुआंग को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक अप्रत्याशित फोन कॉल भी प्राप्त हुआ। ट्रंप ने उपस्थित लोगों से कहा कि "रोबोट दुनिया पर कब्जा नहीं करने जा रहे हैं" और इस पूरे विवाद को एक 'झांसा' बताया। इस बीच, अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में संघीय एजेंसियों को एआई क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व के रास्ते में आने वाली बाधाओं को हटाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की एआई एक्शन प्लान में तेज नवाचार और कम नियामकीय प्रतिबंधों पर जोर दिया गया है। दूसरी ओर, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने इस सप्ताह कहा था कि उन्नत एआई का विकास इस सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए कि यह मानवता की मदद करे और हमेशा मानव नियंत्रण में बना रहे। उन्होंने भी एआई विकास में संतुलित और सोच-समझकर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया था। वहीं, सितंबर की शुरुआत में एंथ्रोपिक के सीईओ दारियो अमोदेई ने चेतावनी दी थी कि एआई की प्रगति उसे समझने और नियंत्रित करने के प्रयासों से तेज हो सकती है।

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भारत तेजी से बन रहा वैश्विक सेमीकंडक्टर हब, वैश्विक कंपनियों का बढ़ा भरोसा: इडस्ट्री लीडर्स

भारत तेजी से बन रहा वैश्विक सेमीकंडक्टर हब, वैश्विक कंपनियों का बढ़ा भरोसा: इडस्ट्री लीडर्स

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'सेमीकॉन इंडिया 2026' के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और वैश्विक तकनीकी कंपनियों के अधिकारियों ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजाइन और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे दुनिया की बड़ी कंपनियों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।इस दौरान, एलएंडटी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संदीप कुमार ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन स्पष्ट और भविष्य की दिशा बताने वाला था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर्स, ऊर्जा और तकनीकी विकास को एक व्यापक दृष्टिकोण के साथ जोड़ा, वह उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जटिल तकनीकी विषयों को सरल और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता रखते हैं और उद्योग जगत को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, टेलीडाइन एफएलआईआर के में एशिया-पैसिफिक (एपैक) इंस्ट्रूमेंटेशन डिवीज के सेल्स वाइस प्रेसिडेंट टी.पी. सिंह ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि सेमीकॉन इंडिया एक बेहद प्रभावशाली और वैश्विक स्तर का मंच बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी पहली बार इस आयोजन में भाग ले रही है और उनका अनुभव काफी सकारात्मक रहा है। उन्होंने आईएएनएस से कहा, "आज सेमीकंडक्टर पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है और यह देखकर खुशी होती है कि भारत इस क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति में खड़ा दिखाई दे रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आयोजन स्थल पर दुनिया की बड़ी सेमीकंडक्टर और तकनीकी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत वैश्विक उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। इस बीच, इन्फोसिस के वीपी और डिलीवरी हेड येग्नास्वामी येग्ना नारायणन ने आईएएनएस से कहा कि यह उनका दूसरा सेमीकॉन इंडिया सम्मेलन है और पिछले आयोजन की तुलना में इस बार काफी बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन तेज गति से आगे बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में हो रही प्रगति स्पष्ट रूप से नजर आती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला के विभिन्न पहलुओं, डिजाइन से लेकर टेप-आउट और अगली पीढ़ी की तकनीकों तक, जिस गहराई से चर्चा की, वह बेहद प्रेरणादायक थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि भारत केवल वर्तमान अवसरों पर नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकी जरूरतों और नवाचारों पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है। इसके अलावा, पार्क सिस्टम्स इंडिया के सेल्स डायरेक्टर श्रीनिवासन रविप्रसाद ने आईएएनएस से कहा कि पिछले 5 वर्षों में भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से विकसित हुआ है। उन्होंने बताया कि वह 2023 से सेमीकॉन इंडिया में भाग ले रहे हैं और हर वर्ष भागीदारी तथा उद्योग की रुचि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नई कंपनियां इस मंच से जुड़ रही हैं और भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि यह भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि देश वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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2026 में वैश्विक एआई खर्च में 49.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान, 2030 तक एआई सेवाओं में 1.2 ट्रिलियन डॉलर का अवसर

2026 में वैश्विक एआई खर्च में 49.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान, 2030 तक एआई सेवाओं में 1.2 ट्रिलियन डॉलर का अवसर

नई दिल्ली। गार्टनर की बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर वैश्विक खर्च वर्ष 2026 में बढ़कर 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 49.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य की बढ़ती एआई जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग मजबूत बनी हुई है। मेमोरी से जुड़ी लागतों में वृद्धि के बावजूद एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च में कोई खास कमी देखने को नहीं मिल रही है। गार्टनर के विशिष्ट उपाध्यक्ष विश्लेषक जॉन-डेविड लवलॉक ने कहा कि एआई डेटा सेंटर क्षमता का निर्माण मानव इतिहास की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक बन चुका है। उन्होंने कहा कि हाइपरस्केलर कंपनियों और सेवा प्रदाताओं द्वारा एआई-अनुकूलित सर्वरों की खरीद पर होने वाला निवेश आगे भी खर्च का सबसे बड़ा क्षेत्र बना रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार, एआई एप्लिकेशन डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म्स के लिए अल्पकालिक आउटलुक भी मजबूत हुआ है। पहले 2026 के लिए इस क्षेत्र में 28 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था, जिसे बढ़ाकर अब 39 प्रतिशत कर दिया गया है। इसका कारण यह है कि कंपनियां, सॉफ्टवेयर प्रदाता और सेवा फर्म अपने-अपने कामकाज की जरूरतों के अनुसार कस्टम एआई एप्लिकेशन विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियां अब अपने सेवा प्रदाताओं से लागत नियंत्रण में मदद और कार्यप्रवाह में उपयोग ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं चाहती हैं, ताकि एआई परियोजनाओं की सफलता को बेहतर तरीके से मापा जा सके। मॉडल डेवलपर्स पर भी अधिक लागत-कुशल एआई मॉडल उपलब्ध कराने का दबाव बढ़ रहा है। विशेष रूप से ऐसे मॉडल जो उद्योगों और कंपनियों की विशिष्ट जरूरतों के अनुरूप हों। इससे डोमेन-स्पेसिफिक लैंग्वेज मॉडल्स (डीएसएलएम) के लिए एक छोटा लेकिन तेजी से बढ़ता अवसर पैदा हो रहा है। इसी का परिणाम है कि जनरेटिव एआई मॉडल्स के लिए 2026 की अनुमानित वृद्धि दर को पहले के 110 प्रतिशत से बढ़ाकर 117 प्रतिशत कर दिया गया है। लवलॉक ने कहा कि अब कंपनियां व्यापक कारोबारी बदलावों के लिए सेवा प्रदाताओं पर पहले की तुलना में कम निर्भर हो रही हैं। इसके बजाय वे अपनी मौजूदा सॉफ्टवेयर प्रणालियों में एआई सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए छोटे और विशिष्ट प्रोजेक्ट्स पर अधिक ध्यान दे रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बड़े परिवर्तनकारी प्रोजेक्ट्स और ऐसे अप्रत्यक्ष एआई प्रोजेक्ट्स का संयुक्त प्रभाव 2030 तक एआई सेवाओं के क्षेत्र में 1.2 ट्रिलियन डॉलर के अवसर का निर्माण कर सकता है। यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में एआई केवल तकनीकी निवेश का क्षेत्र नहीं रहेगा, बल्कि सेवाओं, सॉफ्टवेयर विकास, परामर्श और डिजिटल परिवर्तन का भी प्रमुख चालक बनेगा।

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