नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ सुनील कुमार बरनवाल ने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) ने 13 करोड़ से ज्यादा इलाज दिए हैं और 48 करोड़ से ज्यादा कार्ड बनाए हैं। उन्होंने बताया कि एआई पर आधारित फ्रॉड डिटेक्शन और बढ़े हुए डिजिटल स्वास्थ्य सुविधा प्लेटफॉर्म इस स्कीम को मजबूत कर रहे हैं।राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ सुनील कुमार बरनवाल ने कहा, "भारत में बनी वस्तुओं की कीमत कम हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी गुणवत्ता खराब है। उन्होंने बताया कि उनका पैकेज एक बंडल पैकेज है, जिसमें प्रक्रिया, दवा और कंज्यूमेबल समेत सभी खर्च शामिल होते हैं। अलग से इस्तेमाल होने वाली चीजों के लिए अलग से भुगतान नहीं किया जाता और न ही कोई अलग रेट तय है। हालांकि, क्लेम के दौरान इस्तेमाल किए गए इम्प्लांट की पूरी जानकारी जरूर ली जाती है।"

उन्होंने आगे बताया कि इम्प्लांट का बिल और बारकोड लिया जाता है और आईटी सिस्टम यह भी जांचता है कि यदि एक से ज्यादा इम्प्लांट का इस्तेमाल हुआ है तो उसे संदिग्ध मानकर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

सुनील कुमार ने आगे कहा कि पिछले 8 साल में अब तक 48 करोड़ से ज्यादा कार्ड बन चुके हैं और यह कार्ड उन्हें गारंटी देता है कि परिवार में 5 लाख तक का इलाज मुफ्त होगा। इस योजना के तहत करीब 2000 प्रक्रियाएं शामिल हैं।

उन्होंने आगे बताया कि इसलिए लगातार कार्ड बनाने की यह योजना अभी भी चल रही है और क्योंकि इस योजना के तहत 7 करोड़ से ज्यादा लोग कवर होंगे, इसलिए हम और लोगों को कार्ड दे रहे हैं। रास्ता स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी है।

सुनील कुमार बरनवाल ने कहा कि पिछले 8 सालों में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत जितने लोगों का इलाज हुआ है और गरीब परिवारों के पैसे बचे हैं, वह एक बड़ी उपलब्धि है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो 13 करोड़ से ज्यादा लोगों का इलाज हुआ है। और इस पर खर्च हुई रकम 2 लाख करोड़ से ज्यादा है।