नई दिल्ली। भारत का उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) का बाजार वर्ष 2030 तक बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपए से 3.25 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच सकता है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की संयुक्त रिपोर्ट में गुरुवार को कहा गया है कि बढ़ती आय, पुराने उत्पादों को बदलने की बढ़ती मांग, आसान वित्तपोषण और उपभोक्ताओं की बदलती खरीदारी आदतें इस वृद्धि की प्रमुख वजह होंगी।रिपोर्ट के अनुसार, देश का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार वर्ष 2030 तक 8-10 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ सकता है। इस वृद्धि से घरेलू स्तर पर सामग्री और विनिर्माण गतिविधियों में 40,000 करोड़ रुपए से 50,000 करोड़ रुपए तक की अतिरिक्त वैल्यू एडिशन का अवसर पैदा हो सकता है।
हालांकि रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीयकरण की वर्तमान गति बनी रहती है, तो इस संभावित अवसर का बड़ा हिस्सा अभी भी आयात के जरिए पूरा किया जा सकता है। इसलिए भारत को महत्वपूर्ण घटकों के घरेलू उत्पादन को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रौद्योगिकी तक पहुंच, बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत प्रतिस्पर्धा ऐसी प्रमुख चुनौतियां हैं, जो कई महत्वपूर्ण घटकों के स्थानीय निर्माण में बाधा बन रही हैं। इनमें एयर कंडीशनर के कंप्रेसर, टीवी डिस्प्ले पैनल, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर जैसे उत्पाद शामिल हैं।
अध्ययन के मुताबिक, विभिन्न श्रेणियों में बिल ऑफ मैटेरियल (बीओएम) का स्थानीयकरण अभी 25 प्रतिशत से 70 प्रतिशत के बीच है। टीवी और एयर कंडीशनर में स्थानीयकरण का स्तर अपेक्षाकृत कम है, जबकि रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन जैसी श्रेणियों में यह अधिक है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टीवी डिस्प्ले पैनल, एसी कंप्रेसर, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर जैसे कई अहम घटकों के लिए भारत अभी भी वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भर है।
इसके बावजूद घरेलू मांग के लिहाज से भारत के सामने बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बड़े घरेलू उपकरणों की पहुंच भारत में एशिया के कई अन्य देशों की तुलना में 20 से 90 प्रतिशत अंक तक कम है। इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में इन उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि की गुंजाइश बनी हुई है।
बीसीजी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीनियर पार्टनर अभीक सिंघी ने कहा, "अगले चरण का फोकस केवल असेंबली या अंतिम उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। भारत को कंपोनेंट्स, तकनीक, उत्पाद डिजाइन और विनिर्माण क्षमताओं को गहराई तक विकसित करना होगा।" उन्होंने कहा कि देश के विशाल घरेलू बाजार को वैश्विक प्रतिस्पर्धा हासिल करने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत को स्थानीयकरण की व्यावसायिक व्यवहार्यता को प्राथमिकता देनी चाहिए, उत्पादन का पैमाना तैयार करने और लागत प्रतिस्पर्धा मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही कंपनियों को केवल घरेलू बाजार के लिए निर्माण करने से आगे बढ़कर दुनिया के लिए डिजाइन और निर्माण करने की दिशा में काम करना चाहिए।












