पुणे। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पुणे के 134 साल पुराने गणेश उत्सव के शांतिपूर्ण और भक्तिमय माहौल में संपन्न होने पर पुणेकरों और गणेश मंडलों के कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पुणे का गणेश उत्सव केवल देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल होने और भगवान गणेश के दर्शन करने के लिए पुणे पहुंचते हैं। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि गणेश उत्सव पुणे की संस्कृति और पहचान का अभिन्न हिस्सा है। यह हमारी 134 साल पुरानी परंपरा है और पुणे की संस्कृति का हिस्सा है। एक गणेश मंडल के कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि के तौर पर मैं पुणे की जनता और सभी कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करना चाहता हूं। पिछले 10 दिनों में पुणे का गणेश उत्सव बहुत अच्छे ढंग से और भक्तिमय वातावरण में आयोजित हुआ। उन्होंने कहा कि इस उत्सव में पुणे के लोगों की बड़ी भागीदारी रहती है और इसी सहभागिता के कारण गणेश उत्सव की परंपरा लगातार समृद्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि अगले दिन होने वाले गणेश विसर्जन की भी अपनी अलग और ऐतिहासिक परंपरा है। विसर्जन के दौरान शहर में होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अपना विशेष महत्व है। मोहोल ने बताया कि पुणे के विधायक हेमंत रासने ने गणेश उत्सव को महाराष्ट्र के राज्य उत्सव का दर्जा दिलाने के लिए प्रयास किए थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने पुणे के गणेश उत्सव को राज्य उत्सव का दर्जा दिया है। उन्होंने इसे पुणे की संस्कृति और परंपरा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इसी परंपरा और उत्सव के प्रतीक के तौर पर कार्यक्रम स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई है। मोहोल ने इस पहल के लिए विधायक हेमंत रासने का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुणे के गणेश उत्सव को और अधिक समृद्ध बनाने में गणेश मंडलों के कार्यकर्ताओं और पुणेकरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मोहोल ने कहा कि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के कई जिलों में सूखे की स्थिति के कारण किसान प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि गणेश उत्सव के दौरान पुणे की जनता की ओर से भगवान गणेश से प्रार्थना की गई कि किसानों की परेशानियां दूर हों और उन्हें संकट से राहत मिले। उन्होंने कहा कि पुणे का गणेश उत्सव आस्था, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक है। सभी पुणेकरों और गणेश मंडलों के कार्यकर्ताओं के सहयोग से इस वर्ष भी उत्सव भक्तिमय और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। उन्होंने सभी नागरिकों से भविष्य में भी इसी तरह उत्सव की परंपरा को आगे बढ़ाने की अपील की।
बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को घोषणा की कि कोप्पल के गवीमठ के श्री अभिनव गवीसिद्धेश्वर महास्वामीजी इस साल राज्य के प्रसिद्ध वार्षिक उत्सव मैसूर दशहरा का उद्घाटन करेंगे। शिवकुमार ने विधानसभा में सूखे की स्थिति पर चर्चा का जवाब देते हुए यह घोषणा की। उन्होंने विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों के सदस्यों को समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा, "इस साल नाडा हब्बा मैसूर दशहरा का उद्घाटन कोप्पल गवीमठ के पूज्य श्री अभिनव गवीसिद्धेश्वर महास्वामीजी करेंगे।" मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने संत को पहले ही निमंत्रण भेज दिया है और गुरुवार सुबह उनसे फोन पर भी बात की। महास्वामीजी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने विधायकों से कहा, "अगले महीने नाडा हब्बा दशहरा आयोजित होगा। मैं आप सभी को इस साल के उद्घाटन कार्यक्रम में आमंत्रित करता हूं। सभी को इसमें शामिल होना चाहिए।" इससे पहले दिन में चित्रदुर्ग में किसानों के सम्मान समारोह में शिवकुमार ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं को दूर करने और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने भद्रा अपर बैंक प्रोजेक्ट का जिक्र किया, जिसके जरिए भद्रा नदी का पानी चित्रदुर्ग तक पहुंचाया गया। उन्होंने इसे 60 साल पुराने सपने का पूरा होना बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2028 से पहले पूरे सूखे क्षेत्र तक पानी पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पांच गारंटी योजनाओं के साथ सरकार ने किसानों के लिए कई पहल की हैं। इनमें छोटे किसानों को मदद, कृषि गतिविधियों के लिए सहायता और उनकी आजीविका में सुधार के उपाय शामिल हैं। शिवकुमार ने यह भी कहा कि सरकार कृष्णा, कावेरी, तुंगभद्रा और महादयी समेत विभिन्न नदियों के पानी में कर्नाटक के हिस्से की रक्षा करेगी। सिरिगेरे में शिवकुमार ने तरालाबालु जगद्गुरु मठ के श्री शिवकुमार शिवाचार्य महास्वामीजी की 35वीं पुण्यतिथि के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने शिक्षा, समाज सेवा, समानता और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में इस संस्था की भूमिका की सराहना की। कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि सरकार ने पश्चिमी घाट और मलनाड क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और लोगों पर इसके प्रभावों पर चर्चा के लिए विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल केंद्र सरकार से संपर्क करेगा और पीढ़ियों से जंगलों के आसपास रहने वाले किसानों के हितों की रक्षा की मांग करेगा। सिंचाई के मुद्दे पर शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने तुंगभद्रा बेसिन में पानी के संरक्षण पर सहमति जताई है। उन्होंने बताया कि गाद जमा होने के कारण करीब 30 टीएमसी पानी के नुकसान को रोकने के लिए एक समानांतर जलाशय बनाने पर चर्चा चल रही है। दिन की प्रमुख घोषणा मैसूर दशहरा के उद्घाटन के लिए श्री अभिनव गवीसिद्धेश्वर महास्वामीजी का चयन रही। शिवकुमार ने दोनों सदनों के सभी सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से उत्सव में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया और बताया कि महास्वामीजी ने मैसूर दशहरा के उद्घाटन का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।
अहमदाबाद। अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने गणेश प्रतिमा के विसर्जन के लिए शहर में 38 स्थानों पर विसर्जन कुंड तैयार किए हैं। इसके साथ ही 290 फायर ब्रिगेड कर्मियों, दो नावों और 38 क्रेन की व्यवस्था की गई है। यह जानकारी नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष कमलेश पटेल ने गुरुवार को दी। बड़ी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन में सुविधा के लिए सभी 38 कुंडों पर क्रेन की व्यवस्था की गई है। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों को जरूरी उपकरणों और सामग्री के साथ अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया जाएगा। फायर ब्रिगेड विभाग ने दो नावों की भी व्यवस्था की है। पटेल ने कहा, "अहमदाबाद नगर निगम ने सभी जरूरी इंतजाम किए हैं, ताकि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से हो सके।" इन व्यवस्थाओं पर गुरुवार को हुई एएमसी की साप्ताहिक स्थायी समिति की बैठक में चर्चा की गई। बैठक में शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक कार्यों से जुड़े मुद्दों पर विचार किया गया। समिति ने एएमसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी पानी की टंकियों को हर छह महीने में साफ करने का निर्देश भी दिया। हाल ही में असरवा गांव की एक पानी की टंकी की सफाई के दौरान हड्डी जैसी एक वस्तु मिलने के बाद यह निर्देश दिया गया है। पटेल ने कहा कि शहर की पानी की टंकियों की हर छह महीने में सफाई की जाती है और असरवा की टंकी की सफाई के दौरान हड्डी जैसी एक वस्तु मिली थी। इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दी गई। इसके बाद फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। पटेल ने कहा, "स्थायी समिति ने निर्देश दिया कि शहर की सभी पानी की टंकियों की हर छह महीने में सफाई की जाए।" समिति ने मानसून के बाद सड़कों की मरम्मत के काम की भी समीक्षा की। बारिश के दौरान शहर में बने ज्यादातर गड्ढों की मरम्मत पहले ही की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जो गड्ढे अभी बाकी हैं, उनकी मरम्मत और जिन इलाकों में बड़े पैमाने पर पैचवर्क की जरूरत है, वहां अगले चार दिनों के भीतर काम पूरा किया जाएगा।
लखनऊ। ब्रजभूमि और पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर का धार्मिक व सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराना है। मणिपुर के वैष्णव श्रद्धालुओं के लिए गोवर्धन का राधा कुंड और शिव कुंड केवल दर्शन-पूजन का केंद्र नहीं, बल्कि पूर्वजों के मोक्ष और अंतिम संस्कारों की अगाध आस्था का मुख्य धाम है। मणिपुर समाज की कई पीढ़ियों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।मणिपुर के वैष्णव समाज में पितृपक्ष (अश्विन मास) अथवा सामान्य दिनों में अपने पूर्वजों व पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान व तर्पण करने का विशेष विधान है। मणिपुरी भाषा में तर्पण को 'तर्पों' कहा जाता है। मणिपुर के श्रद्धालु बिहार के गयाजी की भांति ही राधा कुंड को पितृ शांति और नित्य धाम की प्राप्ति का परम पवित्र स्थल मानते हैं। मान्यता है कि राधा कुंड के पावन जल में भक्तिपूर्वक तर्पण व पूजन करने से पितरों को श्री राधा-कृष्ण के चरण कमलों में स्थान प्राप्त होता है। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर राधा कुंड क्षेत्र के समीप स्थित शिव कुंड, जहां भगवान शिव सिद्धेश्वर स्वरूप में विराजमान हैं, का मणिपुरी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व है। शास्त्रों में भगवान शिव को 'वैष्णवानां यथा शंभु' यानी वैष्णवों का परम गुरु माना गया है। इसी मान्यता के तहत मणिपुर में किसी परिजन के देहावसान के बाद उनकी अस्थियों का कुछ अंश गंगाजी में और कुछ अंश ब्रज के इस पवित्र शिव कुंड या मानसी गंगा व राधा कुंड के समीपस्थ कुंडों में विसर्जित किया जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा से दिवंगत आत्मा को संसार चक्र से मुक्ति मिल जाती है। 18वीं शताब्दी में मणिपुर के राजा महाराज भाग्यचंद्र (जय सिंह) द्वारा गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय अपनाने के बाद से ही मणिपुर का ब्रज धाम से गहरा नाता जुड़ा। राधा कुंड स्थित 'गोपाल मणिपुरी मंदिर' और प्राचीन समाधि स्थल आज भी इस ऐतिहासिक व सांस्कृतिक रिश्ते की गवाही देते हैं। आज भी बड़ी संख्या में मणिपुर से श्रद्धालु अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में ब्रजवास करने और पूर्वजों के मोक्ष की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं। इसको लेकर एक स्थानीय दीपू जोशी ने समाचार एजेंसी को बताया कि मणिपुर के लोग इस स्थान पर अपने परिजनों की अस्थियों को लेकर आते हैं। यहां राधा रानी को चढ़ाते हैं और पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ने के साथ वृक्ष पर कपड़ा बांधकर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि हम यह सब बचपन से ही देखते आ रहे हैं। जब से होश संभाला है, देखते आए हैं कि मणिपुर के लोग यहां ढोल-नगारों के साथ आकर यह सभी क्रिया करते हैं। वे पितृपक्ष में तो आते ही आते हैं। उनका गया यहीं है। यहां पर श्राद्ध कुंड पर एक गया घाट भी बना हुआ है, वहां वे अपने पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करते हैं। तीर्थ पुरोहित मणिपुर, भूपेंद्र गोस्वामी ने बताया कि मणिपुर के लोग यहां राधा कुंड पर अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण करने के लिए आते हैं। मणिपुर के लोग यहां अपने परिजनों की अस्थियों को लेकर आते हैं और शिव कुंड में जाते हैं, जहां एक पीपल का पेड़ है। वहां वह अस्थियों को विसर्जित करते हैं। इसके बाद लोग राधा-कुंड में स्नान करते हैं। मंदिर में ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं। फिर वापस जाते हैं। यह प्रथा काफी पहले से चली आ रही है। मणिपुर से आए गोदाधोर सिंह ने कहा कि मणिपुर के ज्यादातर लोग यहीं आकर अपने परिजनों की अस्थियां विसर्जित करने के साथ-साथ पूर्वजों का पिंडदान करते हैं।
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है। 25 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 11:07 बजे तक रहेगा। इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शुक्रवार सुबह 6:20 बजे सूर्योदय और शाम 5:16 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, शाम 5:27 चंद्रोदय और तड़के 5:42 बजे चंद्रास्त होगा। शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। संकटों से रक्षा के लिए हाथ में अनंत सूत्र (धागा) बांधा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के पालन से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा अंत में साधक को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। यह आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र है। सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से लेकर कन्या राशि के 10 डिग्री 00 मिनट तक फैला हुआ है। इसके स्वामी सूर्य देव हैं। इस नक्षत्र के देवता अर्यमा (देवताओं और पितरों के प्रमुख) हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक तेजस्वी, महत्वाकांक्षी, परोपकारी और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण होते हैं। शुक्रवार दोपहर लगभग 2:49 बजे तक शूल योग रहेगा। ज्योतिष पंचांग के 27 नित्य योगों में से नौवां योग शूल योग है, जिसे सामान्यतः एक अशुभ और संघर्षकारी योग माना जाता है। 'शूल' का शाब्दिक अर्थ 'कांटा', 'भाला' या 'नुकीला अस्त्र' होता है। जब सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों का योग एक निश्चित अंश (विशेषकर 106 डिग्री 40 मिनट से 120 डिग्री 00 मिनट के बीच) होता है, तब यह नित्य शूल योग बनता है। इस दौरान कोई भी शुभ काम करने से बचना चाहिए। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ और फलदाई समय माना जाता है। आमतौर पर यह लगभग 48 मिनट (या दिनमान के अनुसार गणना किया गया आठवां मुहूर्त) होता है। माना जाता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से सभी प्रकार के अशुभ प्रभाव या दोष स्वतः नष्ट हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर रहते हैं तब अभिजीत मुहूर्त की बेला होती है। शुक्रवार को अमृतकाल तड़के 3:23 से 5:00 बजे तक रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) होता है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए यह समय श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन राहुकाल सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। हिन्दू ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। राहुकाल को सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है, जो हर दिन लगभग 90 मिनट का होता है। स्थान बदलने के साथ इसके समय में भी बदलाव हो जाता है। इस दौरान कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उन्हें जारी रखा जा सकता है। शुक्रवार को गुलिक काल सुबह 7:49 से 9:19 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, इसको अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है। जो काम बार-बार करना चाहते हैं तो इस काल में किया जा सकता है। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना या निवेश करना इस काल में अच्छा माना जाता है। इस दिन यमगंड काल दोपहर 3:17 से 4:47 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समय के दौरान स्वास्थ्य, दीर्घायु या सामान्य दुर्भाग्य से संबंधित बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस काल को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। नया व्यापार या नया काम शुरू करने से बचना चाहिए। इस दौरान किसी यात्रा पर भी निकलने से बचना चाहिए और पैसों के लेनदेन से भी बचना चाहिए। शुक्रवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है। इस दिन चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेगा। चंद्रमा का कुंभ राशि में रहना लोगों के आत्मविश्वास, ऊर्जा और कार्यक्षमता को बढ़ाने वाला रहेगा। इस दौरान सोचे हुए कार्य समय पर पूरे हो सकते हैं और नए अवसरों की प्राप्ति हो सकती है। नौकरी में अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिलेगा। व्यापार में नई रणनीति या योजना बनाने के लिए यह समय अनुकूल है। नए संपर्क से लाभ मिलने के योग हैं। शुक्रवार को दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस अशुभ दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।