भोपाल, जीतेन्द्र यादव। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि परियोजना में काम कर रही नागार्जुन कंपनी और भाजपा के बीच संबंधों की जांच होनी चाहिए। सिंघार ने आरोप लगाया कि नागार्जुन कंपनी से चुनावी चंदे के नाम पर 60 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड मिले और इसी कारण कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार किसानों एवं आदिवासियों पर दबाव बना रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि परियोजना प्रभावित गांवों में ग्राम सभाओं की प्रक्रिया नियमों के अनुसार नहीं कराई गई। कई गांवों में ग्राम सभा आयोजित ही नहीं हुई, जबकि कहीं सरपंचों के फर्जी हस्ताक्षर कराकर जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई पूरी कर ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों की सहमति के बिना जमीन अधिग्रहित की गई और मुआवजा वितरण में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं।
उमंग सिंघार ने दावा किया कि एक गांव में करीब 8 करोड़ रुपये का मुआवजा ऐसे लोगों को बांट दिया गया जो वहां के निवासी ही नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक आदिवासी गांव, जहां कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहता, वहां एक मुस्लिम परिवार के नाम मुआवजा जारी कर दिया गया। उनके अनुसार अब तक करीब 450 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है और आगे लगभग 1,000 करोड़ रुपये का मुआवजा और दिया जाना है, जिसमें भी अनियमितताओं की आशंका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे किसानों और ग्रामीणों को पुलिस द्वारा डराया-धमकाया जा रहा है। सिंघार ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर छोड़ने के लिए 20 से 30 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं तथा कई लोगों के जमीन संबंधी दस्तावेज भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए हैं, ताकि उन्हें मुआवजा न मिल सके। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतनी जल्दबाजी में भूमि अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लगभग 44 हजार करोड़ रुपये की केन-बेतवा लिंक परियोजना में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मुआवजा वितरण की समीक्षा करने तथा प्रभावित किसानों और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उन्होंने आंदोलनरत ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनी हैं और इस मुद्दे को सदन से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।




