दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर मध्य प्रदेश का सियासी पारा बेहद गर्म हो चुका है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने इस मुकाबले को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। शुक्रवार से इस चुनावी दंगल में घमासान और तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि दोनों ही पार्टियों के शीर्ष और दिग्गज नेताओं ने अब दतिया में ही अपना डेरा डालना शुरू कर दिया है। राजनीतिक दलों ने इस चुनाव को जीतने के लिए अपनी सांगठनिक और रणनीतिक तैयारियां चरम पर पहुंचा दी हैं। बड़े नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपकर चुनावी मैदान में उतार दिया गया है, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में दतिया की धरती पर एक बेहद आक्रामक और दिलचस्प चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा।


भाजपा की चुनावी व्यूहरचना: नरोत्तम मिश्रा के कंधों पर कमान और रूठों को साधने की कोशिश

रणनीतिक रूप से अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को चुनाव संचालन समिति का प्रमुख नियुक्त किया है। पार्टी के इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि दतिया का यह उपचुनाव अब रणनीतिक रूप से पूरी तरह नरोत्तम मिश्रा के नेतृत्व और दिशा-निर्देशों में ही लड़ा जाएगा। इस संचालन समिति को संतुलित और मजबूत बनाने के लिए इसमें कुल 32 अन्य नेताओं को भी जगह दी गई है, जिसमें पूर्व से लेकर वर्तमान तक के क्षेत्रीय नेताओं को शामिल कर आंतरिक असंतोष को शांत करने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही, भाजपा ने चुनाव अभियान प्रमुख की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया को सौंपी है, जबकि प्रदेश उपाध्यक्ष रणवीर सिंह रावत को सह-प्रमुख का जिम्मा देकर चुनावी प्रचार तंत्र को धार देने की कोशिश की है।


नरोत्तम मिश्रा के कड़े तेवर: समर्थकों के बीच प्रशासन को दी खुली चेतावनी

इसी चुनावी गहमागहमी के बीच पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने गुरुवार दोपहर शहर के एक निजी होटल में अपने समर्थकों के साथ एक बड़ी बैठक की, जिसमें उनके कड़े तेवर साफ नजर आए। उन्होंने स्थानीय पुलिस और प्रशासन को सख्त लहजे में सचेत करते हुए कहा कि वे बातों को भूलने वाले इंसान नहीं हैं और दोस्ती तथा दुश्मनी दोनों को बखूबी याद रखते हैं। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि यदि केवल चक्काजाम खुलवाना था, तो पार्टी कार्यालय पर आंसू गैस के गोले क्यों छोड़े गए और गाड़ियों में तोड़फोड़ क्यों की गई, जिसके वीडियो साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। डॉ. मिश्रा ने साफ तौर पर कहा कि निर्दोष कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज और मुकदमे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, हालांकि इसके साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों से यह भावुक अपील भी की कि वे अपनी नाराजगी पार्टी या भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी पर न निकालें।


अवधेश नायक का बड़ा फैसला: भाजपा में जाने की अटकलों पर लगाया पूर्ण विराम

दूसरी तरफ, पिछले कुछ दिनों से दतिया की राजनीति में चल रही दलबदल की अटकलों पर विराम लगाते हुए वरिष्ठ नेता अवधेश नायक ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से गहन विचार-विमर्श करने के बाद यह अंतिम निर्णय लिया है कि वे भारी आंतरिक कलह और भीतरघात से जूझ रही भाजपा में शामिल नहीं होंगे। नायक ने खुलासा किया कि उनकी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से सकारात्मक बातचीत हो चुकी है, जिन्होंने उन्हें आगामी 2028 के मुख्य विधानसभा चुनाव में पार्टी टिकट देने का पक्का वादा किया है। इस भरोसे के बाद अवधेश नायक ने ऐलान किया है कि वे पूरी निष्ठा के साथ कांग्रेस में ही बने रहेंगे और जीतू पटवारी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी प्रत्याशी के प्रचार में जुटेंगे।


कांग्रेस का जवाबी पलटवार: जीतू पटवारी दतिया में खुद संभालेंगे चुनावी मोर्चा

भाजपा की घेराबंदी का जवाब देने के लिए कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी घनश्याम सिंह के पक्ष में पूरी ताकत झोंक दी है और चुनावी रणनीति को आक्रामक रूप दे दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने अन्य कार्यक्रमों से निवृत्त होकर शुक्रवार से दो दिनों के लिए दतिया में ही रुकेंगे और खुद इस पूरे चुनाव संचालन की कमान अपने हाथों में लेंगे। दतिया प्रवास के दौरान पटवारी न केवल सघन जनसंपर्क और विशाल चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे, बल्कि वे स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकें भी लेंगे। कांग्रेस के इस रणनीतिक कदम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करना है जो किसी कारणवश मुख्यधारा से रूठे हुए हैं, ताकि पार्टी एकजुट होकर भाजपा को कड़ी चुनौती दे सके।