रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा शहर के वार्ड क्रमांक 5 स्थित पदमधर कॉलोनी में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने लालता सदन पहुंचकर जांच शुरू की। ईडी के 4 से 5 सदस्यीय टीम कृष्णकांत सोहगौरा और सौरभ सोहगौरा के निवास पर दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, कृष्णकांत सोहगौरा रीवा के चर्चित ठेकेदारों में शामिल हैं। उन्हें भाजपा नेता प्रदीप सोहगौरा का भाई बताया जा रहा है। ईडी की कार्रवाई की खबर फैलते ही क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुटने लगी और मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

हालांकि अभी तक ईडी की ओर से कार्रवाई के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। टीम घर के भीतर दस्तावेजों की जांच और आवश्यक जानकारी एकत्र करने में जुटी हुई है। समाचार लिखे जाने तक कार्रवाई जारी थी।

ईडी की जांच को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई के कारणों का खुलासा हो सकेगा।

भाजपा नेता प्रदीप सोहगौरा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईडी को कुछ भी मिलने वाला नहीं है। ईडी जब छोटे-मोटे लोगों के यहां छापा मारेगी तो क्या मिलेगा? ईडी देश में बदनाम हो चुकी है और इनके सजा का औसत 2 फीसदी भी नहीं है।

प्रदीप ने आरोप लगाया कि ईडी के अधिकारी रिश्वत लेकर चुप हो जाते हैं और चालान तक नहीं पेश कर पाते हैं।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने मंगलवार को महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ चल रही जांच के सिलसिले में करनाल, दिल्ली और गोवा में अशोक मित्तल, सौरभ ढींगरा, भरत भूषण मित्तल, रमन सिंघल और अन्य से जुड़े 11 ठिकानों पर 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम' (पीएमएलए), 2002 के तहत तलाशी अभियान चलाया।

ईडी ने सीबीआई द्वारा महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड, इसके डायरेक्टरों और अन्य लोगों के खिलाफ आईपीसी, 1860 और 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। यह मामला 'फिनाकल' में संबंधित एंट्री किए बिना अनधिकृत स्विफ्ट संशोधनों के जरिए 'फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिट' (एफएलसी) की वैल्यू को धोखाधड़ी से बढ़ाने से जुड़ा है, जिससे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और कंसोर्टियम बैंकों को लगभग 155.21 करोड़ रुपए का गलत नुकसान हुआ।