कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले की नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) नेहा पच्चीसिया एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई हैं। 1.07 करोड़ रुपये के जमीन सौदे में कथित धोखाधड़ी और दबाव बनाने के आरोप में कुठला थाना पुलिस ने सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापत्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
1.07 करोड़ का सौदा, रजिस्ट्री सिर्फ 18.20 लाख में कराने का आरोप
शिकायतकर्ता आकाश लोधी का आरोप है कि सीएसपी के प्रभाव और दबाव के चलते उनके पिता रमेश लोधी से ग्राम कन्हवारा स्थित बेशकीमती जमीन की रजिस्ट्री जबरन मारूफ अहमद हनफी के नाम कराई गई। जमीन का वास्तविक सौदा 1.07 करोड़ रुपये में तय हुआ था, लेकिन रजिस्ट्री महज 18.20 लाख रुपये दर्शाकर कराई गई। इसमें से भी केवल 15 लाख का चेक और 3.20 लाख रुपये नकद दिए गए, जबकि शेष 88.80 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया। आरोप यह भी है कि जब रमेश लोधी जेल में बंद थे, उसी दौरान जमीन का नामांतरण भी खरीददार के पक्ष में करवा लिया गया।
सरकारी गाड़ी से रजिस्ट्री दफ्तर ले जाने और बंधक बनाने का आरोप
शिकायत में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने पीड़ित रमेश लोधी को दो दिनों तक अपने आवास पर रखा और बाद में सरकारी वाहन से रजिस्ट्री कार्यालय ले जाकर जबरन दस्तखत करवाए गए। पुलिस अब 15 अप्रैल 2026 को हुए 15 लाख रुपये के बैंक ट्रांजैक्शन, बैंक स्टेटमेंट, रजिस्ट्री और नामांतरण से जुड़े सभी सरकारी दस्तावेजों की गहन फॉरेंसिक व तकनीकी जांच कर रही है।
पहले भी वसूली और लापरवाही के मामलों में घिर चुकी हैं सीएसपी
सीएसपी नेहा पच्चीसिया का विवादों से पुराना नाता रहा है:
- 30 हजार की वसूली का आरोप: जुलाई माह में एक ट्रांसपोर्टर से वाहन चेकिंग के दौरान 30 हजार रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगने के बाद उन्हें निलंबित कर तीन थानों के प्रभार से हटा दिया गया था।
- हत्याकांड में डिफॉल्ट जमानत: कुठला थाना क्षेत्र के एक चर्चित हत्याकांड में तय समय सीमा के भीतर कोर्ट में चालान पेश न होने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिल गई थी, जिसमें उनकी भूमिका की जांच जबलपुर एएसपी अनु बेनीवाल को सौंपी गई थी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दर्ज एफआईआर के आधार पर बैंक खातों, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित गवाहों के बयानों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है, जिसके बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।














