नई दिल्ली। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने कहा है कि भारत को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम विकसित करने के लिए बैटरी निर्माण, उपयोग, सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन और जीवनचक्र समाप्त होने के बाद उनके प्रबंधन (एंड-ऑफ-लाइफ मैनेजमेंट) पर समन्वित रूप से काम करना होगा। उनका कहना है कि केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरियों का उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग की व्यापक व्यवस्था विकसित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में टेरी यानी द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टीईआरआई) की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा कि बैटरी क्षेत्र पर चर्चा केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग के बाद बची हुई क्षमता वाली बैटरियों के सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन की संभावनाओं को भी तलाशना होगा। इससे बैटरियों का उपयोगी जीवन बढ़ाया जा सकेगा और उनकी आर्थिक उपयोगिता अधिकतम की जा सकेगी।

इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे बैटरी इकोसिस्टम से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा की।

भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने कहा कि सरकार घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ सेकंड-लाइफ बैटरियों, ट्रेसबिलिटी, मानकों और रीसाइक्लिंग से जुड़े ढांचे को भी विकसित कर रही है। उनका कहना था कि ऐसे कदम भारत को प्रतिस्पर्धी और सर्कुलर बैटरी अर्थव्यवस्था विकसित करने में मदद करेंगे।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के वैज्ञानिक कुलदीप राणा ने कहा कि सेकंड-लाइफ बैटरियों के उपयोग की संभावनाएं केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं हैं। उनका उपयोग घरेलू उपकरणों, रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम्स और यूपीएस सिस्टम्स जैसे कई क्षेत्रों में किया जा सकता है।

सम्मेलन में बैटरी वैल्यू चेन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, जिनमें घरेलू एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) निर्माण क्षमता का विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विकास और बैटरियों के पुन: उपयोग, पुनर्प्रयोजन तथा रीसाइक्लिंग की बढ़ती जरूरतें शामिल थीं।

वहीं, टेरी के वरिष्ठ निदेशक ए.के. सक्सेना ने कहा कि केवल उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के बजाय मूल्य सृजन के स्थानीयकरण पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैटरियों को शुरुआती चरण से ही सर्कुलर दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाना चाहिए। साथ ही सेकंड-लाइफ बैटरियों की शेष क्षमता और प्रदर्शन का आकलन कर उनमें उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाना भी जरूरी है।

इसके अलावा, इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (आईईएसए) के प्रबंध निदेशक विनायक वालिम्बे ने देश में मजबूत और प्रतिस्पर्धी बैटरी उद्योग के निर्माण के लिए घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वहीं बीएसईएस राजधनी पावर लिमिटेड की वरिष्ठ प्रबंधक सुगंधिता वाधेरा ने कहा कि भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए राज्यों को क्षमता नियोजन, मजबूत भुगतान सुरक्षा व्यवस्था और वितरण क्षेत्र में अधिक लचीले ऊर्जा संसाधनों पर काम करना होगा। इससे ऊर्जा तंत्र को अधिक मजबूत और त्वरित प्रतिक्रिया देने योग्य बनाया जा सकेगा।