नई दिल्ली। इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के बीच कई देशों की हवा बारूद के धुएं से भर गई। इजरायल की ओर से ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट साउथ पार्स फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने कतर और संयुक्त अरब अमीरात के गैस प्लांट पर हमला कर दिया। इस बीच 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान के इस हमले की निंदा की और इन्हें तुरंत रोककर अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने को कहा।
सऊदी की राजधानी रियाद में गुरुवार को हुई मीटिंग के बाद जारी एक संयुक्त बयान में 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने को कहा।
यह बयान अजरबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों की ओर से जारी किया गया था।
बयान में, मंत्रियों ने खाड़ी देशों-जॉर्डन, अजरबैजान और तुर्किए पर हमलों की निंदा की। विदेश मंत्रियों ने कहा कि ईरान ने रिहायशी क्षेत्रों, नागरिकों के इलाके के ढांचे, जिसमें तेल की फैसिलिटी, डीसेलिनेशन प्लांट, एयरपोर्ट, रेजिडेंशियल बिल्डिंग और डिप्लोमैटिक जगहें शामिल हैं, को टारगेट किया था।
इसके अलावा मंत्रियों ने लेबनान पर इजरायल के हमलों की भी निंदा की और इलाके की सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए समर्थन दोहराया।यह संयुक्त बयान तब आया, जब ईरान ने खाड़ी में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया और कतर में सुविधाओं में आग लगने और सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की खबरें आईं।
संयुक्त बयान में विदेश मंत्रियों ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के साथ संबंधों का भविष्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करने और उनके अंदरूनी मामलों में दखल न देने पर निर्भर करता है। साथ ही, किसी भी तरह से उनकी संप्रभुता या उनके इलाकों का उल्लंघन करने से बचना चाहिए और इलाके के देशों को धमकाने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल या विकास नहीं करना चाहिए।
इससे पहले, ईरानी सरकारी मीडिया ने अमेरिका और इजरायल पर उसके तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादन सुविधाओं के कुछ हिस्सों पर हमला करने का आरोप लगाया था।
वहीं कतर ने रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमले की कड़ी निंदा की है। कतर ने कहा कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन है। इस हमले के बाद ईरानी दूतावास के सैन्य अटैशे और सुरक्षा अटैशे के साथ-साथ उनके ऑफिस के स्टाफ को भी 'पर्सोना नॉन ग्राटा' घोषित कर दिया और उन्हें 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया। जब कोई देश किसी विदेशी राजनयिक को स्वीकार नहीं करता या उसे देश छोड़ने के लिए कह देता है, तो उसे पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित किया जाता है।
एक आधिकारिक बयान में कतर ने इस हमले को देश की आजादी का खुला उल्लंघन और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और इलाके की स्थिरता के लिए सीधा खतरा बताया।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि कतर शुरू से ही इस संघर्ष से खुद को दूर रखने की नीति पर चल रहा है। तनाव बढ़ने से बचने के वादे के बावजूद ईरान ने उसे और पड़ोसी देशों को निशाना बनाना जारी रखा है। यह एक गैर-जिम्मेदाराना तरीका है जो इलाके की सुरक्षा को कमजोर करता है और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।
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