भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का आगामी शीतकालीन सत्र आगामी 7 दिसंबर से प्रारंभ होकर 11 दिसंबर तक चलेगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने 12वें सत्र की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। पांच दिवसीय इस संक्षिप्त किंतु महत्वपूर्ण सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार वित्तीय वर्ष का दूसरा अनुपूरक बजट सदन के पटल पर रखेगी। इसके साथ ही सरकार कई प्रमुख विधायी कार्यों को संपन्न कराने और अहम संशोधन विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में जुटी हुई है।


सचिवालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, पांच दिनों के इस सत्र में प्रतिदिन विधानसभा की नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र को देखते हुए मंत्रालय और विभागीय स्तर पर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। वित्त विभाग दूसरे अनुपूरक बजट से जुड़े वित्तीय प्रस्तावों, आवश्यक आवंटनों और दस्तावेजों को अंतिम रूप देने में तेजी से जुटा हुआ है। इसके अतिरिक्त पंचायत राज और कॉलोनाइजर एक्ट जैसे महत्वपूर्ण कानूनों में संशोधन से जुड़े मसौदों पर भी विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।



चार दिन शासकीय कामकाज, अंतिम दिन अशासकीय संकल्पों पर होगी चर्चा

विधानसभा सचिवालय के आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार, सत्र के शुरुआती चार दिनों में प्रश्नकाल के साथ-साथ शासकीय कार्य, ध्यानाकर्षण और विधायी प्रस्ताव निपटाए जाएंगे। वहीं सत्र के अंतिम दिन 11 दिसंबर को प्रश्नकाल और दोपहर 1:30 बजे तक सरकारी कामकाज का निष्पादन किया जाएगा। दोपहर के भोजनावकाश के बाद का शेष समय अशासकीय संकल्पों और गैर-सरकारी प्रस्तावों पर विचार-विमर्श व चर्चा के लिए आरक्षित रखा गया है।


पंचायत राज और कॉलोनाइजर एक्ट में बड़े बदलाव की तैयारी

शीतकालीन सत्र के दौरान डॉ. मोहन यादव सरकार दो बेहद महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव सदन में लाने जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पंचायतों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 'पंचायत राज संशोधन विधेयक' पेश किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, नगरीय विकास एवं आवास विभाग अवैध कॉलोनियों पर नकेल कसने और नियमों को पारदर्शी बनाने के लिए 'कॉलोनाइजर एक्ट' में संशोधन से संबंधित विधेयक प्रस्तुत करने की रूपरेखा तैयार कर चुका है।

मंत्रालय स्तर पर दोनों विधेयकों के प्रारूप को अंतिम रूप दिया जा रहा है। विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने से पूर्व इन संशोधनों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली आगामी कैबिनेट बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही इन्हें सदन की विधायी कार्यसूची में शामिल कर लिया जाएगा। कुल मिलाकर पांच दिवसीय इस सत्र में वित्तीय प्राथमिकताओं के साथ-साथ ग्रामीण व नगरीय विकास से जुड़ी नई नीतियों पर गहन विधायी मंथन होने की पूरी संभावना है।