नई दिल्ली, 3 नवंबर । फ्रांस को एक बार फिर इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) का सह-अध्यक्ष चुना गया है। फ्रांस 2027 से 2029 तक दो साल के कार्यकाल के लिए इस पद पर रहेगा। नई दिल्ली में 2 से 5 नवंबर 2026 तक आयोजित आईएसए की नौवीं महासभा में फ्रांस ने बुर्किना फासो को हराकर यह चुनाव जीता।
फ्रांस ने कहा है कि सह-अध्यक्ष के रूप में वह आईएसए का समर्थन जारी रखेगा और सौर ऊर्जा तथा स्वच्छ बिजलीकरण के क्षेत्र में इसे वैश्विक मंच पर और मजबूत बनाने में मदद करेगा। यह फैसला तुर्की के अंताल्या में 9 से 20 नवंबर के बीच होने वाले सीओपी-31 सम्मेलन से पहले आया है।
आईएसए की स्थापना 2015 में भारत और फ्रांस ने मिलकर की थी। यह संगठन दुनिया भर में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का काम करता है। 2015 में हुए सीओपी-31 सम्मेलन के बाद से यह भारत-फ्रांस ऊर्जा और जलवायु सहयोग की एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
आईएसए के उद्देश्यों के प्रति फ्रांस की प्रतिबद्धता को 2018 में भारत के साथ हुए नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग समझौते से भी देखा जा सकता है, जिसे 2025 में फिर से नवीनीकृत किया गया था। दोनों देश नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी परिवहन, ग्रीन फाइनेंस और जैव विविधता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। इन परियोजनाओं का संचालन फ्रांसीसी विकास 'एजेंसी एजेंस फ्रांसेज डे डेवलपमेंट' (एएफडी) के जरिए किया जा रहा है।
फरवरी 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया था। इस साझेदारी के तहत भारत और फ्रांस जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने पर काम कर रहे हैं।
फ्रांसीसी कंपनियां भारत में ऊर्जा, परिवहन, सर्कुलर इकोनॉमी और जल शोधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इनके प्रोजेक्ट कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को बढ़ावा देते हैं, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने में मदद करते हैं और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-7 तथा पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने में योगदान देते हैं।
इन क्षेत्रों में फ्रांसीसी कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी ‘होराइजन 2047 रोडमैप’ के 'पार्टनरशिप फॉर द प्लैनेट' स्तंभ को भी मजबूत करती है। इस रोडमैप की घोषणा 2023 में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने पर की गई थी।
फ्रांस के पारिस्थितिक परिवर्तन राज्य मंत्री मैथ्यू लेफेव्र, जो वर्तमान में आईएसए के सह-अध्यक्ष हैं, ने 2026 के लिए आईएसए को 50 हजार यूरो का स्वैच्छिक योगदान देने की घोषणा की।
महासभा के दौरान उन्होंने आईएसए के लिए फ्रांस की प्रमुख प्राथमिकताएं भी बताईं। जैसे स्टार-सी कार्यक्रम के जरिए विकासशील देशों में क्षमता निर्माण। फ्रांस 2021 से अब तक इस कार्यक्रम में 12.5 लाख यूरो का योगदान दे चुका है। अफ्रीका सोलर फैसिलिटी जैसी पहलों के माध्यम से वित्तीय सहायता की उपलब्धता बढ़ाना। फ्रांस ने 2025 में इसके लिए 1.5 लाख यूरो दिए थे। आईएसए के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को बढ़ावा देना, ताकि उसका वैश्विक प्रभाव बढ़ सके। ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं और वैल्यू चेन में विविधता लाना।
आईएसए के अलावा, फ्रांस जलवायु परिवर्तन से जुड़ी एक और वैश्विक पहल कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। फ्रांस ने 2024 से इस वर्ष तक भारत के साथ मिलकर सीडीआरआई की सह-अध्यक्षता की।
इस साल की शुरुआत में सीडीआरआई और फ्रांसीसी विकास एजेंसी एएफडी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर हुए, जिससे आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे और जलवायु अनुकूल विकास के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं खुली हैं।















