नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में अप्रैल 2020 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच सोने ने अगस्त के बाद अपनी सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त दर्ज की है। सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में लगभग 4.5 प्रतिशत का उछाल आया, जबकि कच्चे तेल के प्रमुख वैश्विक बेंचमार्क 12 प्रतिशत से अधिक टूट गए।विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण निवेशकों ने शेयर बाजारों से धन निकालकर कमोडिटी बाजार, विशेषकर सोने की ओर रुख किया। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर बदलती धारणाओं ने भी कीमती धातुओं के पक्ष में माहौल बनाया।
हालांकि शुक्रवार को भारतीय वायदा बाजार में सोने की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली। दिसंबर डिलीवरी वाला एमसीएक्स सोना वायदा 1,731 रुपए यानी 1.20 प्रतिशत गिरकर 1,42,364 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 1,84,977 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
ऊर्जा बाजार में इस सप्ताह भारी गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल 104-105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से गिरकर करीब 90 डॉलर तक आ गया। वहीं ब्रेंट क्रूड 97-98 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच गया। दोनों प्रमुख बेंचमार्कों में सप्ताहभर में 12 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
सोने में 4.5 प्रतिशत की तेज बढ़त के बावजूद सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन कीमतें अपने उच्च स्तर से नीचे आ गईं, जिसका मुख्य कारण अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़े रहे, जिनके बाद डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी देखने को मिली।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को 24 कैरेट सोने का भाव 1,41,452 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि पिछले सप्ताह के अंत में यह 1,40,054 रुपए था। इससे स्पष्ट है कि सप्ताहभर में सोने की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत बढ़त दर्ज की गई।
अक्टूबर की बैठक में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को यथावत रखा था, लेकिन बाद में फेड के कुछ अधिकारियों द्वारा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आगे और दर वृद्धि की आवश्यकता जताने से बाजार में सख्ती की उम्मीदें फिर बढ़ गईं।
शुक्रवार को जारी अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट ने भी इस संभावना को मजबूत किया। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में गैर-कृषि रोजगार (नॉन-फार्म पेरोल) 1.65 लाख बढ़े, जबकि बाजार केवल 65,000 नई नौकरियों की उम्मीद कर रहा था। इसी दौरान बेरोजगारी दर 4.2 प्रतिशत से घटकर 4.1 प्रतिशत पर आ गई।
मजबूत श्रम बाजार आंकड़ों के बाद दिसंबर में अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बढ़कर लगभग 81 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई और 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड लगभग 4.88 प्रतिशत तक पहुंच गई। साथ ही डॉलर भी मजबूत हुआ, जिससे सप्ताह के अंत में सोने और चांदी पर दबाव देखा गया।
विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों में आई नरमी ने दिवाली से पहले भारत में भौतिक खरीदारी को बढ़ावा दिया। हालांकि अमेरिकी ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका तथा ऊंची उधारी लागत सोने की कीमतों में लंबे समय तक तेजी को सीमित कर सकती है।
तकनीकी दृष्टि से विशेषज्ञों के अनुसार, एमसीएक्स सोने के लिए 1,43,000 से 1,43,700 रुपए का दायरा निकटतम प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) क्षेत्र है। वहीं 1,41,000 से 1,40,000 रुपए का स्तर प्रमुख समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र माना जा रहा है। चांदी के लिए 1,86,000 से 1,88,000 रुपए का दायरा प्रतिरोध और 1,78,000 से 1,80,000 रुपए का दायरा महत्वपूर्ण समर्थन स्तर के रूप में देखा जा रहा है।
















