पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के जल संसाधन विभाग में रिश्वतखोरी के खुलासे के बाद अपने बेतुके बयान से सुर्खियों में आए कार्यपालन यंत्री (EE) सीबी अहिरवार पर आखिरकार शासन की गाज गिर गई है। विभाग में सागर लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के बाद मीडिया के सामने कैमरे पर यह दावा करना कि "वे परसेंटेज नहीं लेते, बल्कि जो कोई खुशी से दे देता है वही लेते हैं", अब अधिकारी के गले की फांस बन गया है। सोशल मीडिया पर बयान वायरल होने और शासन स्तर पर विभाग की जमकर किरकिरी होने के बाद कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिस बयान को अधिकारी अपनी तथाकथित ईमानदारी और बेबाकी साबित करने की कोशिश कर रहे थे, उसी बयान ने उनकी कुर्सी छीन ली।
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत पन्ना जल संसाधन विभाग में सागर लोकायुक्त की छापामार कार्रवाई से हुई थी। लोकायुक्त टीम ने मझगांय बांध की नहर निर्माण से जुड़े एक ठेकेदार के लंबित बिल को पास कराने के एवज में 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए विभाग के दो कर्मचारियों को रंगे हाथों धर दबोचा था। इस ट्रैप कार्रवाई से पूरे दफ्तर में हड़कंप मच गया था। जब मीडिया कर्मियों ने विभाग में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के इस खुले खेल पर सीधे कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार से सवाल किया, तो उन्होंने रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाने की बात कहने के बजाय बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब दे डाला।
कैमरे के सामने दिए अपने विवादित बयान में ईई अहिरवार ने खुलेआम कहा था कि वे ठेकेदारों से कोई तय परसेंटेज (कमीशन) नहीं मांगते, बल्कि काम के बाद जो कोई स्वेच्छा से या खुशी से दे जाता है, वे वही स्वीकार कर लेते हैं। भ्रष्टाचार को सामान्य बताने वाले इस सार्वजनिक बयान का वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर प्रसारित हुआ, प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। एक जिम्मेदार प्रथम श्रेणी अधिकारी द्वारा रिश्वत को 'खुशी से दी गई भेंट' के रूप में स्वीकार करने की इस हिमाकत पर चौतरफा सवाल उठने लगे और इसे सिविल सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन माना गया।
मामले के तूल पकड़ने और शासन की छवि धूमिल होने के बाद उच्च स्तर पर संज्ञान लेते हुए कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार के खिलाफ निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। पन्ना में लोकायुक्त की रंगे हाथों गिरफ्तारी, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप और फिर विभाग प्रमुख का यह वायरल कबूलनामा समूचे जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा धब्बा साबित हुआ है। फिलहाल निलंबन की इस सख्त कार्रवाई के बाद पन्ना के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।













