वाराणसी। वाराणसी में चल रही विश्व संगोष्ठी आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान’ के दूसरे दिन संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (एसडीएसएन) के अध्यक्ष जेफरी सैक्स ने दुनिया को सामंजस्य, शांति और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने ईरान पर युद्ध को अनुचित और अवैध बताते हुए अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का पालन करने की नसीहत दी। वहीं भारत को स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने और क्वाड की चीन विरोधी नीति से दूर रहने की सलाह दी।विश्व संगोष्ठी ‘आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान’ के दूसरे दिन संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (एसडीएसएन) के अध्यक्ष जेफरी सैक्स ने कहा, "हमें कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करके ऊर्जा प्रणाली को कार्बन मुक्त करने की जरूरत है, क्योंकि ये जीवाश्म ईंधन जलवायु के लिए हानिकारक हैं। हमारे पास सौर, पवन और सुरक्षित रूप से इस्तेमाल की जाने वाली परमाणु ऊर्जा जैसे विकल्प हैं।"
उन्होंने कहा कि सरकारों को हरित ऊर्जा नीतियां अपनानी चाहिए और इस सदी के मध्य तक शून्य-कार्बन ऊर्जा प्रणाली हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। यह अब संभव है, क्योंकि सौर और अन्य शून्य-कार्बन ऊर्जा स्रोत सस्ते हो गए हैं। दुनिया आंतरिक दहन इंजन के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर भी बढ़ रही है।
जेफरी सैक्स ने कहा कि हमें एक-दूसरे के साथ सामंजस्य बैठाना चाहिए, विभिन्न सभ्यताओं का सम्मान करना चाहिए और अपनी साझा मानवता को पहचानना चाहिए। दूसरों को दुश्मन समझना विनाशकारी है और इससे टकराव और युद्ध हो सकते हैं। हमें एक-दूसरे के साथ और प्रकृति के साथ सामंजस्य की जरूरत है, क्योंकि मनुष्य प्राकृतिक दुनिया का ही हिस्सा है।
एसडीएसएन के अध्यक्ष ने कहा कि ट्रंप दुनिया में अस्थिरता फैलाने वाली एक बड़ी ताकत रहे हैं। ईरान पर युद्ध अनुचित, अवैध है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है। यह उनकी इस सोच को दर्शाता है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन नहीं करना है, जिसमें दूसरे देशों के राष्ट्रपतियों का अपहरण जैसी कार्रवाइयां भी शामिल हैं। यह बेहद चिंताजनक है। अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत हर दूसरे देश की तरह ही समान नियमों का पालन करना चाहिए।
अध्यक्ष जेफ्री सैक्स ने कहा कि भारत एक बड़ी ताकत है और उसे संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के माध्यम से बहुपक्षवाद को बढ़ावा देना चाहिए। उसे चीन के खिलाफ अमेरिका के साथ खड़े होने के बजाय स्वतंत्र रुख बनाए रखना चाहिए। मैं क्वाड का समर्थन नहीं करता, जो चीन विरोधी नीति पर चलता है। भारत को स्वतंत्र रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत, चीन, अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ सहित बड़ी ताकतों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचना चाहिए और एक-दूसरे की सीमाओं के पास अपनी सेना तैनात करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह खतरनाक है।
लुम्सा विश्वविद्यालय, रोम, इटली में इतिहास दर्शन के एमेरिटस प्रोफेसर मार्सेलो सांचेज सोरोंडो ने कहा, "मध्य पूर्व को शांति की जरूरत है। हमें शांति के लिए पोप लियो के आह्वान का पालन करना चाहिए, संवाद के माध्यम से समझौते तक पहुंचना चाहिए और बमों, विशेषकर परमाणु बमों के इस्तेमाल से बचना चाहिए, क्योंकि वे युद्ध के अंत में तबाही ला सकते हैं। यह आज एक गंभीर समस्या है। हमें उस प्राचीन ज्ञान की ओर लौटने की जरूरत है, जो सभी सभ्यताओं के केंद्र में ईश्वर को रखता है।"















