वाराणसी। वाराणसी में आयोजित एफएचआरएआई के 56वें वार्षिक सम्मेलन के व्यावसायिक सत्र में पर्यटन और होटल उद्योग में निवेश बढ़ाने पर मंथन हुआ। अधिकारियों ने बताया कि अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए निवेशक अपनी परियोजना की फाइल किस विभाग और अधिकारी के स्तर पर लंबित है, इसकी जानकारी ले सकेंगे। होटल उद्योग ने बताया कि भारत में होटल शुरू करने में औसतन 400 दिन लगते हैं, जबकि सिंगापुर में यह प्रक्रिया करीब 65 दिनों में पूरी हो जाती है।


पर्यटन मंत्रालय ने परियोजना स्तर पर अपनी अनुमति की जरूरत खत्म करने की दिशा में कदम उठाया है। अधिकारियों के मुताबिक अब सोच को ‘अनुमति मिलने तक इंतजार’ से बदलकर ‘जब तक प्रतिबंधित न हो, अनुमति है’ की ओर ले जाने की जरूरत है। वाराणसी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में नई होटल परियोजनाओं से निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।


बैठक में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। होटल उद्योग ने सोलर प्लांट और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोत अपनाने के लिए सब्सिडी या कर लाभ देने की मांग की। साथ ही होटल उद्योग में कुशल कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए नए पाठ्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय होटल प्रबंधन परिषद आधुनिक होटल प्रबंधन, रेवेन्यू मैनेजमेंट और फ्रंट ऑफिस जैसे कौशल को पाठ्यक्रम में शामिल कर रही है।


उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार पर्यटन क्षेत्र में एक करोड़ रुपये के निवेश से करीब 78 रोजगार पैदा हो सकते हैं। ऐसे में छोटे और मझोले निवेशकों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अधिकारियों और उद्योग जगत ने माना कि केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय से ही सिंगल विंडो व्यवस्था का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। यूपी में पर्यटन को प्राथमिकता क्षेत्र बनाए जाने के बीच इन सुधारों से वाराणसी समेत प्रदेश के पर्यटन और होटल उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है।