भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चे पर लगाम कसने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। अब आईएएस, आईपीएस और सचिव स्तर के अधिकारी बिना मुख्य सचिव की अनुमति के दिल्ली, गुजरात या किसी अन्य राज्य-विदेश नहीं जा सकेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।

यात्राओं पर ब्रेक, डिजिटल बैठकें अनिवार्य

सरकार के नए फरमान के मुताबिक, प्रदेश के बाहर शासकीय यात्रा पर पूर्ण नियंत्रण लगा दिया गया है। अन्य अधिकारियों को अपने विभागीय सचिव से अनुमति लेनी होगी।

सरकार ने स्पष्ट कहा है कि विभागीय बैठकें, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण और सेमिनार अब ज्यादातर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही आयोजित किए जाएंगे। जिन कामों को ऑनलाइन किया जा सकता है, वहां भौतिक यात्रा बिल्कुल नहीं होगी।

PM मोदी के मितव्ययिता मंत्र पर अमल

राज्य सरकार ने इन निर्देशों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मितव्ययिता और संसाधनों के बेहतर उपयोग वाले फार्मूले से जोड़ा है। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासनिक खर्च कम करना, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

ऊर्जा बचत पर फोकस

  • सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा ऑडिट अनिवार्य।
  • शाम 7 बजे के बाद अनावश्यक पंखे, लाइट, कंप्यूटर और अन्य उपकरण बंद करने के सख्त निर्देश।
  • प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने पर जोर।

अन्य महत्वपूर्ण निर्देश

  • अधिकारियों-कर्मचारियों को ऑफिस आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, बस और इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • कृषि विभाग को प्राकृतिक एवं जैविक खेती बढ़ावा देने को कहा गया।
  • निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश और प्लास्टिक वेस्ट बिटुमिन जैसी पर्यावरण अनुकूल सामग्री अनिवार्य।
  • PNG गैस नेटवर्क विस्तार और उज्ज्वला योजना में डुप्लीकेट/अपात्र कनेक्शन हटाने का अभियान।
  • फूड ऑइल (खाद्य तेल) के कम उपयोग के लिए जन-जागरूकता अभियान।

90 दिन का बड़ा अभियान

जनसंपर्क विभाग को ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और संसाधन संरक्षण को लेकर 90 दिवसीय जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। पर्यटन विभाग को “देखो अपना देश” और “सबसे पहले मध्यप्रदेश” जैसे कैंपेन के जरिए घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने को कहा गया है।

सभी विभागों को इन निर्देशों की पालना की मासिक रिपोर्ट GAD को भेजनी होगी।

सरकार का दावा: इन उपायों से न सिर्फ सरकारी खर्च में भारी कमी आएगी, बल्कि ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।