बेंगलुरु। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार को बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त पर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले की जांच से जुड़ी जानकारी चुनिंदा तरीके से सार्वजनिक कर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
उन्होंने पुलिस से यह भी सवाल किया कि प्रज्वल रेवन्ना मामले से जुड़े एक पुराने वीडियो विवाद में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश की कथित भूमिका की जांच क्यों नहीं की जा रही है।
गौरतलब है कि रविवार को बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने कहा था कि जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले में एक मोबाइल फोन का आदान-प्रदान केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी के आवास पर हुआ था।
जेडी(एस) मुख्यालय जेपी भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए कुमारस्वामी ने सवाल उठाया कि रविवार को अवकाश होने के बावजूद पुलिस आयुक्त ने इतनी जल्दबाजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की और चल रही जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक क्यों की।
उन्होंने कहा, "पुलिस आयुक्त को इतनी जल्दी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की क्या जरूरत थी? उन्होंने मीडिया में कई जानकारियां साझा कीं, खासकर मेरे दिल्ली स्थित आवास का जिक्र किया। विशेष शाखा सीसीबी द्वारा पूछताछ किए जा रहे व्यक्ति ने कथित तौर पर वह मोबाइल फोन हमारे सोशल मीडिया कार्यों को संभालने वाले एक व्यक्ति को दिया था। इस संदर्भ में आयुक्त ने कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से पता चलता है कि वह व्यक्ति मेरे आवास के पास मौजूद था।"
जांच के तरीके पर सवाल उठाते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि पुलिस को लोगों में भ्रम पैदा करने के बजाय निष्पक्ष और उचित जांच करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "यदि सीडीआर से यह पता चलता है कि वह व्यक्ति मेरे आवास के आसपास था, तो पुलिस को मेरे एक और सवाल का जवाब देना चाहिए। प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ दर्ज दूसरे मामले में कार्तिक ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश के साथ मिलकर वीडियो बनाए थे। वे वीडियो पूरी दुनिया में प्रसारित किए गए थे।"
कुमारस्वामी ने वर्ष 2023 की 5 और 6 अगस्त का जिक्र करते हुए सवाल किया कि उस दौरान कार्तिक कहां था और क्या वह शिवकुमार के आवास पर मौजूद था। उन्होंने यह भी पूछा कि जांच अधिकारियों ने इस संबंध में क्या कार्रवाई की है।
उन्होंने कहा, "अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? सीएम शिवकुमार को जांच से बाहर क्यों रखा गया है? यदि सीडीआर के आधार पर मेरा नाम लिया जा सकता है, तो अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। सीएम शिवकुमार को इन घटनाक्रमों पर जवाब देना चाहिए।"
केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने एक कन्नड़ समाचार चैनल और उसके मालिक के ठिकानों पर सीसीबी की छापेमारी को भी खारिज करते हुए कहा कि यह जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश है कि उनके नाम के जांच में आने के कारण कार्रवाई की जा रही है।
राज्य के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा लगाए गए इस आरोप पर कि वह कांग्रेस नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करवाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी पर दबाव बना रहे हैं, कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री या केंद्रीय गृह मंत्री से किसी प्रकार की सुरक्षा की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, "मुझे प्रधानमंत्री या गृह मंत्री से संरक्षण मांगने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार का मुकाबला करने की क्षमता मुझमें खुद है।"
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) भर्ती मामले में हुई कथित अनियमितताओं के लिए प्रियांक खड़गे जिम्मेदार हैं और राज्य गृह मंत्री की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "सिर्फ स्टिंग ऑपरेशन मामले में ही नहीं बल्कि केपीएससी घोटाले में भी क्या-क्या गड़बड़ियां हुई हैं? इसके लिए जिम्मेदार स्वयं राज्य के गृह मंत्री हैं। जब वह आरडीपीआर मंत्री थे, तब उन्होंने 26 सहायक कार्यकारी अभियंताओं (एईई) की नियुक्ति को लेकर कथित तौर पर अनियमित और अवैध फैसला लिया था।"
कुमारस्वामी की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब स्टिंग ऑपरेशन मामले की जांच को लेकर कांग्रेस और जेडी(एस) के बीच राजनीतिक टकराव तेज होता जा रहा है। दोनों दल जांच के तरीके और राजनीतिक नेताओं की कथित भूमिका को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

















