नई दिल्ली। दिल्ली के जनकपुरी स्थित दिल्ली हाट में राष्ट्रीय गौधन महासंघ की ओर से आयोजित 'गोधन दिवाली महोत्सव 2026' संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अध्यक्ष आलोक कुमार और असम के पूर्व राज्यपाल जगदीश मुखी सहित अन्य ने हिस्सा लिया। इस दौरान गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ पूरे देश में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग उठाई गई।

विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। वर्ष 1966 में इसी दिन सभी गोवंश की सुरक्षा की मांग को लेकर संत दिल्ली पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने उन पर गोलीबारी और लाठीचार्ज किया था। इस घटना में कई संतों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। आज हमने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने गोवंश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।

उन्होंने कहा कि भारत में गोसंरक्षण कानून बनना अभी बाकी है। उन लोगों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब देश में गौसंरक्षण के लिए कानून बनेगा और घर-घर में गाय पाली जाएगी। गाय का गोबर और गोमूत्र भी बहुत उपयोगी है। इनके महत्व को समझने और इनके इस्तेमाल को बढ़ावा देने की जरूरत है।

वहीं, असम के पूर्व राज्यपाल जगदीश मुखी ने कहा कि आज का दिन उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 7 नवंबर कई वर्षों पहले संसद के सामने एक विशाल प्रदर्शन और रैली आयोजित की गई थी। मैं एम.कॉम में पढ़ रहा था। प्रदर्शन में पहली पंक्ति में मौजूद था। इसी दौरान गोलीबारी शुरू हो गई और कर्फ्यू लगा दिया गया।

उन्होंने उस घटना को याद करते हुए कहा कि उन्हें शाम चार बजे तक हॉस्टल पहुंचना था, लेकिन कर्फ्यू के कारण वह रातभर वहां नहीं पहुंच सके। अगले दिन सुबह चार बजे पैदल चलकर हॉस्टल पहुंचे। आज इस कार्यक्रम में शामिल होकर उन्हें आत्मसंतुष्टि मिली है। उन्होंने कहा कि गोवंश की रक्षा और संवर्धन के लिए बहुत से लोग लगातार बेहतर प्रयास कर रहे हैं।

जगदीश मुखी ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में गोवंश की संख्या में वृद्धि हुई है। गोशालाओं में गोबर और गोमूत्र से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। इससे गोवंश के आर्थिक महत्व को भी समझने में मदद मिलेगी। गाय धार्मिक दृष्टिकोण से पूजनीय होने के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए केंद्रीय कानून बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। भाजपा शासित राज्यों में इस दिशा में कानून बनाए गए हैं और अब पूरे देश में एक समान कानून लागू करने की मांग धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।

पूर्व राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि सरकार का रुख भी इस दिशा में सकारात्मक है और एक दिन पूरे देश में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला कानून लागू होगा। उन्होंने कहा कि गोवंश के संरक्षण के लिए समाज और सरकार, दोनों को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है।