कोझिकोड। केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के शासनकाल में राज्य में निपाह रोगियों को दी गई दवाओं पर नए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस बात पर संदेह है कि क्या मरीजों को क्लिनिकल ट्रायल के लिए बनी दवाएं भी दी गई थीं और यह भी कि सप्लाई की गई कुछ दवाओं पर निर्माण की तारीख (मैन्युफैक्चरिंग डेट) ही नहीं थी।के. मुरलीधरन ने कोझिकोड में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर व्यापक जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में आपूर्ति में शामिल विदेशी दवा कंपनियों, लेन-देन में सुविधा प्रदान करने वाले बिचौलियों और उन्हें प्राप्त वित्तीय लाभों की भी पड़ताल की जाएगी।
ये नए खुलासे केरल के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा गुरुवार को विधानसभा में दिए गए उस बयान के बाद सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने बताया था कि 2021 में खरीदी गई रेमडेसिविर दवा, जिसकी समाप्ति तिथि 30 मई, 2023 थी, का इस्तेमाल बाद के वर्षों में किया गया था।
केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (केएमएससीएल) ने 3 जून, 2021 को 42 लाख रुपए की लागत से इस दवा की 3,000 शीशियां खरीदी थीं। मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड से पता चला है कि 2023-24 में 102 शीशियां, 2024-25 में 34 और 2025-26 में 10 शीशियां इस्तेमाल की गईं।
मंत्री ने बताया कि 2026 में इस्तेमाल की गई 50 शीशियां 12 जून, 2026 को बहरीन से अलग से मंगाई गई थीं।
तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉ. आर. अरविंद की अध्यक्षता में एक चिकित्सा बोर्ड का गठन किया गया है ताकि यह जांच की जा सके कि क्या एक्सपायर्ड दवाओं के संदिग्ध उपयोग का संबंध मरीजों की मृत्यु से था और क्या अन्य प्राप्तकर्ताओं को भी प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
के. मुरलीधरन ने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन द्वारा उन्हें भेजे गए पत्र में केवल मरीजों को सस्ती दवाएं देने के खिलाफ आगाह किया गया था और उसमें क्लिनिकल ट्रायल या एक्सपायर हो चुकी दवाओं का कोई जिक्र नहीं था।
उन्होंने कहा कि जांच में सभी तथ्य सामने आने के बाद सरकार उचित कार्रवाई करेगी। संयोगवश यह घटना 2016-26 के दौरान हुई जब पूर्व पिनाराई विजयन राज्य के प्रमुख थे।

















