रायगढ़, रोहित तिर्की। छत्तीसगढ़ में चार सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार तूल पकड़ती जा रही है। 13 अक्टूबर से शुरू हुआ यह प्रदेशव्यापी आंदोलन अब 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है। पटवारियों के सामूहिक कार्य बहिष्कार के चलते समूचे प्रदेश सहित रायगढ़ जिले में राजस्व व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ गई है, जिससे नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और आय-जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कार्यों के लिए आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अपनी मांगों पर अड़े पटवारियों ने अब विरोध प्रदर्शन के नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में विकासखंड धरमजयगढ़ के पटवारियों ने बुधवार को धरना स्थल पर काले कपड़े पहनकर शासन की नीतियों के खिलाफ अनोखा विरोध दर्ज कराया। पटवारियों ने शासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए साफ कर दिया कि जब तक उनकी जायज मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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वेतन विसंगति और पीवी ऐप में सुधार सहित चार प्रमुख मांगें
पटवारी संघ द्वारा उठाई जा रही मांगों में लंबे समय से लंबित वेतन विसंगति को दूर करना, समयबद्ध पदोन्नति की व्यवस्था सुनिश्चित करना, विभागीय पीवी ऐप की तकनीकी खामियों को दूर कर उसे यूजर-फ्रेंडली बनाना तथा आंदोलन के दौरान प्रशासन द्वारा की गई दमनात्मक कार्रवाइयों व बदले की भावना से किए गए स्थानांतरण आदेशों को तत्काल निरस्त करना प्रमुख रूप से शामिल है। पटवारी संघ के अध्यक्ष बालमुकुंद सारथी ने कहा कि आम जनता की राजस्व संबंधी समस्याओं को सुलझाने वाले पटवारी आज खुद अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को विवश हैं। वहीं उपाध्यक्ष राजकुमार राठिया ने आरोप लगाया कि शासन समस्याओं का हल निकालने के बजाय 48 घंटे में काम पर लौटने का नोटिस देकर निलंबन जैसी दमनकारी कार्रवाई कर रहा है।
पटवारियों के समर्थन में उतरी कांग्रेस, सकारात्मक संवाद की उठाई मांग
पटवारियों के इस लंबे आंदोलन को अब विपक्षी दल कांग्रेस का भी खुला समर्थन मिल गया है। धरमजयगढ़ में कांग्रेस मंडल अध्यक्ष संतोष प्रधान के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने धरना स्थल पहुंचकर पटवारी संघ के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। कांग्रेस नेताओं ने पटवारियों की मांगों को पूरी तरह तर्कसंगत और जायज बताते हुए कहा कि पटवारी राजस्व प्रशासन की सबसे अहम और जमीनी कड़ी हैं। उन्होंने शासन से हठधर्मिता छोड़कर आंदोलनकारी कर्मचारियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करने और समस्याओं का त्वरित निराकरण करने की मांग की। इधर, पटवारी संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि दंडात्मक कार्रवाइयों से डरने के बजाय उनका आंदोलन मांगें पूरी होने तक अनवरत जारी रहेगा।

















