सतना, सजल कुमार रजक। नगर निगम परिषद की बैठक में शहर की बदहाल स्थिति को लेकर विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने शहर में फैली गंदगी, जर्जर सड़कों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सवाल उठाते हुए नगर निगम प्रशासन को आड़े हाथों लिया। विधायक ने कड़े शब्दों में कहा कि शहर की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि बाहर के लोग अब सतना में रिश्ता करने से भी कतराने लगे हैं। उन्होंने शहर में पसरी गंदगी और उससे उठने वाली दुर्गंध को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
नामकरण पर तंज: जन्म-मृत्यु काउंटर की तरह नामकरण का भी खोल दें अलग काउंटर
परिषद की बैठकों में विभिन्न तालाबों, स्टेडियमों और सार्वजनिक स्थलों के नामकरण को प्राथमिकता दिए जाने पर विधायक ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि नगर निगम में जिस तरह जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के काउंटर बने हैं, उसी तरह नामकरण का भी एक अलग काउंटर खोल दिया जाना चाहिए। विधायक ने जोर देकर कहा कि नामकरण की राजनीति करने से ज्यादा आवश्यक आम जनता को साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल और गड्ढा-मुक्त सड़कें उपलब्ध कराना है।
500 करोड़ का टर्नओवर फिर भी बुनियादी सुविधाएं ठप, विकास कार्यों पर उठे सवाल
विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार से मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये के अनुदान और नगर निगम के करीब 500 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर के बाद भी शहर की हालत दयनीय है। नागरिकों को चलने लायक सड़कें तक नसीब नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने मांग की कि परिषद की बैठकों में फिजूल के मुद्दों के बजाय सड़क, पानी और सफाई व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए।
महापौर के आरोपों का दिया जवाब, सदन के पटल पर रखे 50 पत्र
हाल ही में महापौर योगेश ताम्रकार द्वारा सोशल मीडिया पर विधायक के खिलाफ विकास की अनदेखी करने के आरोप लगाए गए थे। इसके जवाब में विधायक कुशवाहा खुद परिषद की बैठक में शामिल हुए। उन्होंने लगभग 20 मिनट तक विकास के मुद्दों पर अपनी बात रखी और अपनी सक्रियता साबित करने के लिए महापौर व नगर निगम प्रशासन को लिखे गए करीब 50 पत्रों का पुलिंदा सदन के पटल पर रख दिया।
दलगत राजनीति से परे विकास की मांग, भोपाल से दिल्ली तक संघर्ष का किया ऐलान
बैठक के अंत में विधायक ने सभी जनप्रतिनिधियों और नगर निगम प्रशासन से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शहर की समस्याएं किसी एक पार्टी की नहीं बल्कि सभी नागरिकों से जुड़ी हैं। सतना के विकास और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए वे सतना से लेकर भोपाल और दिल्ली तक हर स्तर पर संघर्ष करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

















