सागर। मध्य प्रदेश का सागर शहर देश का पहला ऐसा शहर बनने की ओर अग्रसर है, जहां चारों दिशाओं में फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्गों का मजबूत नेटवर्क विकसित हो रहा है। रेलवे जंक्शन की तर्ज पर अब सागर को "नेशनल हाईवे जंक्शन" के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में यहां से गुजरने वाला देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-44 सहित चार प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और उन्नयन कार्य जारी है, जबकि दो नए ग्रीनफील्ड हाईवे भी प्रस्तावित हैं। अगले पांच वर्षों में सागर से उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत तक फोरलेन सड़क संपर्क उपलब्ध होने की संभावना है।


सागर जिले से लगभग 162 किलोमीटर लंबा एनएच-44 गुजरता है, जो श्रीनगर से कन्याकुमारी तक देश को जोड़ता है। इसके अलावा सागर-कानपुर फोर टू सिक्सलेन हाईवे, सागर-भोपाल एनएच-146 का फोरलेन निर्माण और सागर-जबलपुर मार्ग के उन्नयन का कार्य तेजी से चल रहा है। सागर-दमोह खंड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है, जबकि दमोह-जबलपुर खंड का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से बुंदेलखंड, महाकौशल और मध्य भारत के बीच सड़क संपर्क और अधिक मजबूत होगा।


भविष्य की योजनाओं में सागर-सतना ग्रीनफील्ड हाईवे और कोटा-विदिशा-सागर एक्सप्रेस-वे भी शामिल हैं। सागर-सतना परियोजना से बुंदेलखंड और बघेलखंड के बीच यात्रा समय लगभग आठ घंटे से घटकर पांच घंटे रह जाएगा। वहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा स्वीकृत कोटा-विदिशा-सागर एक्सप्रेस-वे करीब 16 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा। इसके अलावा 688 करोड़ रुपये की लागत से 20 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड फोरलेन बायपास भी बनाया जा रहा है, जो एनएच-44 और एनएच-146 को आपस में जोड़ेगा।


सागर सांसद लता वानखेड़े का कहना है कि केंद्र सरकार सागर के भौगोलिक महत्व को देखते हुए इसे राष्ट्रीय राजमार्गों के प्रमुख जंक्शन के रूप में विकसित कर रही है। वहीं विधायक शैलेन्द्र जैन के अनुसार चारों दिशाओं में फोरलेन कनेक्टिविटी मिलने से सागर भविष्य में लॉजिस्टिक हब के रूप में उभरेगा और उद्योगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद सागर न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश की सड़क परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन जाएगा।